लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पारंपरिक माटीकला को प्रोत्साहित करने और स्थानीय शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में 28 अक्टूबर से ‘माटीकला महोत्सव-2026’ का आयोजन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की ओर से आयोजित यह राज्य स्तरीय महोत्सव 7 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसकी थीम ‘मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि’ रखी गई है।
महोत्सव के तहत मिट्टी से बने उत्पादों की प्रदर्शनी डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर में लगाई जाएगी। आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए माटीकला उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इस आयोजन के माध्यम से पारंपरिक कला को पहचान दिलाने और शिल्पकारों को अपने उत्पाद लोगों तक पहुंचाने का अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
28 अक्टूबर को शाम 5 बजे होगा उद्घाटन
माटीकला महोत्सव की प्रदर्शनी का उद्घाटन बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे किया जाएगा। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड, खादी भवन प्रांगण, 8-तिलक मार्ग, डालीबाग, लखनऊ में आयोजित होगा।
उद्घाटन समारोह में प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर की भी कार्यक्रम में उपस्थिति रहेगी।
आयोजन 28 अक्टूबर से 7 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न जिलों के शिल्पकारों द्वारा बनाए गए माटीकला उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में स्टॉलों की कुल संख्या, उत्पादों की कीमतों, बिक्री के लक्ष्य या प्रतिदिन के कार्यक्रमों का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है।
पारंपरिक शिल्पकारों को मिलेगा मंच
उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड का उद्देश्य प्रदेश में मिट्टी से जुड़े पारंपरिक कारीगरों और शिल्पियों के काम को प्रोत्साहित करना है। बोर्ड के आधिकारिक परिचय के अनुसार, इसका गठन पारंपरिक माटीकला को संरक्षित और विकसित करने, कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, तकनीकी विकास को बढ़ावा देने तथा विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे उद्देश्यों के लिए किया गया है।
माटीकला महोत्सव इसी दिशा में शिल्पकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने वाला आयोजन है। प्रदर्शनी के जरिए लोगों को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में तैयार होने वाले मिट्टी के हस्तशिल्प उत्पादों को देखने और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
पारंपरिक कला से जुड़े कारीगरों के लिए उत्पादों का प्रदर्शन और उनकी बिक्री तक पहुंच महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे आयोजनों में शिल्पकार अपने काम को सीधे ग्राहकों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं। हालांकि, इस वर्ष के महोत्सव में संभावित बिक्री या शिल्पकारों की आय में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
‘मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि’ है थीम
महोत्सव की थीम ‘मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि’ के माध्यम से पारंपरिक माटीकला और सांस्कृतिक विरासत के संबंध को रेखांकित किया गया है। मिट्टी से जुड़े शिल्प भारत की पारंपरिक कलाओं का हिस्सा रहे हैं। इन कलाओं को आगे बढ़ाने में कारीगरों के कौशल, परंपरागत तकनीकों और बाजार तक पहुंच की भूमिका रहती है।
महोत्सव के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इससे आगंतुकों को अलग-अलग क्षेत्रों के कारीगरों के काम को एक ही स्थान पर देखने का अवसर मिलेगा। आयोजन का उद्देश्य केवल प्रदर्शनी तक सीमित न रहकर पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहन देना और आम लोगों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ना भी है।
नागरिकों और कला प्रेमियों से शामिल होने की अपील
उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिशिर ने नागरिकों, कला प्रेमियों और अन्य लोगों से महोत्सव में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने लोगों से खादी भवन परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन करने और स्थानीय शिल्पकारों का उत्साहवर्धन करने का आग्रह किया है।
महोत्सव में शामिल होने के इच्छुक लोग 28 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 के बीच डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर पहुंच सकते हैं। उद्घाटन समारोह का निर्धारित समय 28 अक्टूबर को शाम 5 बजे है।
माटीकला महोत्सव-2026 से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं, प्रदर्शनी के दैनिक समय, स्टॉलों की संख्या और उत्पादों की बिक्री संबंधी विस्तृत जानकारी के लिए आयोजकों की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।



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