Ghaziabad KW Srishti Society Incident: दिल्ली से सटे गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित पॉश KW सृष्टि सोसाइटी से दिल दहला देने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोसाइटी के एक बंद फ्लैट से बदहवास और फटे कपड़ों में भागी युवती ने नीचे के फ्लोर पर लोगों से मदद की गुहार लगाई। घटना के 3 दिन बीत जाने के बाद भी एफआईआर (FIR) दर्ज न होने और पुलिस की हीलाहवाली को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी गुस्सा है।
फटे कपड़ों में रोती हुई भागी युवती, CCTV से हुई पुष्टि
घटना KW सृष्टि सोसाइटी के फ्लैट नंबर A-1703 की बताई जा रही है। चश्मदीदों और सोसाइटी के सुरक्षा सूत्रों के अनुसार:
मदद के लिए मिन्नतें: वारदात के बाद डरी-सहमी युवती फ्लैट का गेट बंद कर नीचे के फ्लोर पर पहुंची और एक फ्लैट की घंटी बजाकर मदद व कपड़े मांगे। युवती रो रही थी और उसके कपड़े फटे हुए थे।
मौके से हुई गायब: जब तक फ्लैट से महिला कपड़े लेकर बाहर आई, तब तक युवती डर के मारे बेसमेंट के रास्ते सोसाइटी के बाहर निकल चुकी थी।
CCTV फुटेज: सोसाइटी के सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में युवती के भागने और बेसमेंट से बाहर जाने की पूरी घटना कैद हो चुकी है, जिससे मामले की पुष्टि हुई है।
गैंगरेप की आशंका: सोसाइटी के निवासियों ने युवती की हालत देखकर उसके साथ दरिंदगी या सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) की गंभीर आशंका जताई है।

3 दिन बाद भी FIR नहीं दर्ज! पुलिस के दावे पर उठे सवाल
सोसाइटी निवासियों का आरोप है कि घटना के 3 दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की है। आरोप है कि स्थानीय चौकी प्रभारी ने पीड़िता/शिकायतकर्ता पर आवेदन (Application) बदलने का दबाव बनाया।
वहीं, दूसरी ओर मामले के तूल पकड़ने पर एसीपी महिला सुरक्षा शुचिता सिंह ने अपना बयान जारी करते हुए कहा है, प्राथमिक जांच में सामने आया है कि युवती का उसके बॉयफ्रेंड के साथ विवाद हुआ था। दोनों के बीच हुई हाथापाई और झगड़े के दौरान युवती की कुर्ती फट गई थी। मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा और पुलिस की कार्यशैली पर खड़े होते गंभीर सवाल
राजनगर एक्सटेंशन जैसी पॉश सोसायटियों में सरेराह एक युवती का फटे कपड़ों में मदद मांगना और फिर गायब हो जाना कानून-व्यवस्था पर बड़ा धब्बा है। पुलिस द्वारा पहले ही दिन से मामले को केवल ‘बॉयफ्रेंड से झगड़ा’ बताकर एफआईआर टालने का प्रयास करना जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। एसीपी स्तर के अधिकारियों को चाहिए कि वे सीसीटीवी फुटेज और पीड़िता के बयान के आधार पर त्वरित निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें, न कि मामले को दबाने का प्रयास हो।


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