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National · August 21, 2026 · admin

नेशनल टीचर्स अवार्ड 2026 की घोषणा: देशभर के 48 उत्कृष्ट शिक्षक होंगे सम्मानित, 5 सितंबर को राष्ट्रपति मुर्मू देंगी राष्ट्रीय पुरस्कार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘नेशनल टीचर्स अवार्ड’ (राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार) का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस वर्ष शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान, नवाचार और निष्ठा का परिचय देने वाले देशभर के 48 स्कूली शिक्षकों को इस सर्वोच्च सम्मान के लिए चयनित किया गया है। प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी आगामी 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ के शुभ अवसर पर नई दिल्ली में एक विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। इस भव्य राष्ट्रीय समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सभी चयनित 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करेंगी और उनके अतुलनीय योगदान की सराहना करेंगी।

27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय संस्थानों से हुआ चयन

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा जारी की गई विस्तृत सूची के अनुसार, इस वर्ष पुरस्कार के लिए चुने गए 48 शिक्षक देश के 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के 6 प्रमुख शैक्षणिक संगठनों से संबंध रखते हैं। इन स्वायत्त व केंद्रीय संस्थानों में केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय समिति (NVS), सैनिक स्कूल, जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत संचालित आदर्श जनजातीय स्कूल (EMRS) और पीएम श्री (PM SHRI) स्कूल शामिल हैं।

इस वर्ष पुरस्कार विजेताओं में लैंगिक समानता और संतुलन का सुंदर समन्वय देखने को मिला है। कुल 48 पुरस्कृत शिक्षकों में 26 पुरुष और 22 महिला अध्यापिकाएं शामिल हैं, जिन्होंने दुर्गम से दुर्गम इलाकों में शिक्षा की अलख जगाई है।

राज्यवार प्रतिनिधित्व: उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के शिक्षक अग्रणी

अगर राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक 3 शिक्षकों को इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए चुना गया है। वहीं बिहार और मध्य प्रदेश से 2-2 उत्कृष्ट अध्यापकों ने इस सूची में अपनी जगह बनाई है।

देश के विविध और दूर-दराज के हिस्सों से चुने गए प्रमुख शिक्षकों के नाम निम्नलिखित हैं:

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: जे प्रकाश राव
  • आंध्र प्रदेश: राजेश कौलुरी
  • अरुणाचल प्रदेश: याकू तामे
  • असम: राजेश बोरदोलोई
  • राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली: सुमन गोयल
  • जनजातीय कार्य मंत्रालय (एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल): जफर आलम
  • गोवा: महादेव हनमंत शिंदे
  • गुजरात: नितिन कुमार महेंद्रकुमार पाठक
  • हरियाणा: अनिल कौशिक
  • हिमाचल प्रदेश: मंजरी वी महाजन
  • जम्मू और कश्मीर: मोहम्मद अयाज रैना
  • मध्य प्रदेश: अर्चना शुक्ला

इनके अलावा महाराष्ट्र, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और लद्दाख जैसे दूरस्थ केंद्र शासित प्रदेशों व राज्यों के निष्ठावान शिक्षकों को भी उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित सूची में शामिल किया गया है।

त्रिस्तरीय पारदर्शी चयन प्रक्रिया से गुज़रे सभी शिक्षक

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस वर्ष भी चयन तीन कठिन चरणों-जिला स्तर, राज्य स्तर और अंत में राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ समिति-के माध्यम से पूरा किया गया।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस पुरस्कार का प्राथमिक उद्देश्य देश के सबसे होनहार और समर्पित शिक्षकों के अद्वितीय प्रयासों को पहचानना है। इसके साथ ही उन गुरुओं को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित करना है जिन्होंने अपनी अटूट प्रतिबद्धता, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और कड़ी मेहनत से न केवल स्कूली शिक्षा का स्तर सुधारा है, बल्कि अपने छात्रों के जीवन को बौद्धिक और नैतिक रूप से समृद्ध बनाया है।

1958 से जारी है पुरस्कारों की गौरवशाली परंपरा

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1958 में की गई थी। इस पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षकों के उच्च स्थान को रेखांकित करना तथा उन शिक्षकों को सार्वजनिक सम्मान देना है जिन्होंने अपनी मेधा और कर्तव्यनिष्ठा से शिक्षा जगत में मिसाल कायम की है।

यह पुरस्कार मुख्य रूप से उन शिक्षकों को दिया जाता है:

  1. जिन्होंने अपनी रचनात्मकता और समर्पण से शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार किया हो।
  2. जिन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से कमजोर से कमजोर छात्र के सीखने और बौद्धिक विकास में मदद की हो।
  3. अध्यापन में नए, डिजिटल और प्रभावी तरीकों व नवाचारों का उपयोग किया हो।
  4. अपने अनुकरणीय आचरण और समर्पण से साथी शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत बने हों।

शिक्षकों से संवाद और प्रधानमंत्री मोदी की पहल

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले अध्यापकों से संवाद स्थापित करने की एक परंपरा रही है। वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले 82 शिक्षकों से विशेष मुलाकात की थी। उस दौरान तमिलनाडु की एक अध्यापिका ने प्रधानमंत्री से बात करते हुए बताया था कि उनके क्षेत्र के ग्रामीण लोग अपनी स्थानीय व क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करना चाहते हैं।

इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा था— “हमारे देश में अक्सर यह भ्रम फैला रहता है कि तमिलनाडु में हर कोई केवल अंग्रेजी ही जानता होगा। इसीलिए हमारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में प्राथमिक शिक्षा देने पर विशेष जोर दिया गया है।”

इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष भी प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में पुरस्कार विजेता 45 शिक्षकों के साथ लगभग 35 मिनट तक गहन चर्चा की थी। उस संवाद सत्र में पीएम ने केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधारों, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े नए कानूनों तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका जैसे विविध विषयों पर विचार साझा किए थे।

5 सितंबर को राष्ट्रपति भवन और विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले समारोह को लेकर चयनित शिक्षकों में अपार उत्साह है। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल से निश्चित रूप से देशभर के लाखों शिक्षकों को शिक्षा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने की प्रेरणा मिलेगी।

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