Sunday, 25 October 2026
नजर सच पर
द पब्लिक लेंस मैगज़ीन सितंबर 2026 का कवर

द पब्लिक लेंस मैगज़ीन

हर महीने, देश से जुड़ी असली कहानियां

राजनीति | समाज | शिक्षा | स्वास्थ्य | टेक्नोलॉजी | ग्राउंड रिपोर्ट | विचार

अभी पढ़ें ›
ताज़ा खबरों के लिए हमारे साथ जुड़ें
BREAKING NEWS
UPPSC RO/ARO भर्ती 2026: 501 पदों पर भर्ती की तैयारी, 26 अक्टूबर से आवेदन की जानकारी फारूक अब्दुल्ला का बयान, ‘पाकिस्तान हमें बचा रहा है’; दिल्ली से न्याय मिलने पर उठाए सवाल अज़रबैजान का अतेशगाह अग्नि मंदिर, जहां देवनागरी में लिखा है ‘ॐ श्री गणेशाय नमः’, जानिए इतिहास घर पर ऐसे करें हार्ट रेट रिकवरी टेस्ट, एक्सरसाइज के बाद नब्ज का कम होना क्यों है जरूरी? बिहार की राजनीति में हलचल: JDU ने अनंत सिंह को 6 साल के लिए निकाला, विधायकी खत्म करने की सिफारिश 25 अक्टूबर 2026 का मूलांक भविष्यफल: मूलांक 1 से 9 तक का विस्तृत अंक ज्योतिष, जानें करियर, धन और प्रेम का हाल 25 अक्टूबर 2026 का राशिफल: मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का भविष्यफल, जानें करियर, धन, प्रेम और स्वास्थ्य का हाल चंदौली: डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना; 11 MLC सीटों पर जीत का किया दावा गाजियाबाद: हाजी सलमान प्रकरण में फरार तस्लीम गिरफ्तार, ट्रोनिका सिटी पुलिस ने की कार्रवाई अमेठी: धान के खेत में मृत मिले 16 वर्षीय किशोर का अंतिम संस्कार, गांव में पसरा मातम
Horoscope · October 11, 2026 · admin

नवरात्रि स्पेशल 12 अक्टूबर 2026 मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र, आरती और व्रत का महत्व

12 अक्टूबर नवरात्रि में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और आराधना

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, जानें पूजा सामग्री, भोग, मंत्र जाप और व्रत के नियम

12 अक्टूबर 2026, सोमवार को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि के इस दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी को तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना गया है। भक्त इस दिन व्रत रखकर, मंत्रों का जाप करके और विधि-विधान से पूजा कर माता रानी से सुख, शांति और आत्मबल की कामना करते हैं।

12 अक्टूबर नवरात्रि पूजा विधि में नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि उनकी उपासना से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने, लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और अपने संकल्प पर कायम रहने की प्रेरणा मिलती है।

कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?

मां ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके इसी तपस्विनी स्वरूप के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल दर्शाया जाता है। उनका स्वरूप साधना, आत्मसंयम, तप और आध्यात्मिक अनुशासन का संदेश देता है।

नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा करते समय भक्त जीवन में धैर्य, साहस और सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा सामग्री

पूजा शुरू करने से पहले आवश्यक सामग्री एक जगह रख लें। सामान्य रूप से इन वस्तुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है:

  • मां दुर्गा या मां ब्रह्मचारिणी की तस्वीर अथवा प्रतिमा
  • साफ चौकी और लाल या सफेद वस्त्र
  • दीपक, घी या तेल और रुई की बत्ती
  • रोली, कुमकुम, अक्षत और चंदन
  • फूल और फूलों की माला
  • फल, मिठाई और घर में तैयार सात्विक भोग
  • जल से भरा पात्र
  • धूप या अगरबत्ती
  • पूजा की पुस्तक या मंत्र

पूजा सामग्री की सूची स्थानीय परंपरा और परिवार की रीति के अनुसार अलग हो सकती है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

1. सुबह स्नान करके पूजा की तैयारी करें

सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल की सफाई करें और चौकी पर मां ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। यदि नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की गई है, तो उसकी नियमित पूजा भी करें।

2. दीपक जलाकर पूजा शुरू करें

माता के सामने दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। इसके बाद हाथ जोड़कर मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण करें। मन में श्रद्धा के साथ पूजा करने का संकल्प लें।

3. माता को फूल और भोग अर्पित करें

मां ब्रह्मचारिणी को फूल, अक्षत और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। अपनी परंपरा के अनुसार फल, मिश्री या अन्य सात्विक प्रसाद चढ़ा सकते हैं। धार्मिक परंपराओं में मां को शक्कर या मिश्री का भोग लगाने का भी उल्लेख मिलता है।

4. मंत्र का जाप करें

मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। भक्त अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं।

मंत्र:

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

5. दुर्गा चालीसा और आरती करें

मंत्र जाप के बाद दुर्गा चालीसा या मां ब्रह्मचारिणी से संबंधित स्तुति का पाठ कर सकते हैं। अंत में माता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति तथा सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।

6. प्रसाद बांटें और जरूरतमंदों की सहायता करें

पूजा के बाद प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांटें। नवरात्रि के अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करना, भोजन कराना और सेवा कार्यों में भाग लेना भी कई परिवारों की परंपरा का हिस्सा है।

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और फल अर्पित किए जाते हैं। कुछ परंपराओं में दूध से बनी मिठाइयां भी भोग में शामिल की जाती हैं।

भोग बनाते समय स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखें। घर की परंपरा के अनुसार प्रसाद तैयार किया जा सकता है। पूजा में भोग का महत्व श्रद्धा और भक्ति से जुड़ा है; अलग-अलग क्षेत्रों में भोग की परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का महत्व

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा को तप, संयम और साधना से जोड़कर देखा जाता है। उनके स्वरूप से यह प्रेरणा मिलती है कि किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए धैर्य, निरंतर प्रयास और आत्मअनुशासन जरूरी हैं।

भक्त इस दिन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता से प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी की उपासना को मानसिक दृढ़ता और आत्मबल से भी जोड़ा जाता है। इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था के संदर्भ में समझना चाहिए।

नवरात्रि के दूसरे दिन व्रत कैसे रखें?

नवरात्रि में व्रत रखने की परंपरा परिवार, क्षेत्र और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग होती है। कुछ भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार या सात्विक भोजन करते हैं।

व्रत रखने वाले इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

  • अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का संकल्प लें।
  • फल, दूध या अन्य अनुमत फलाहार का सेवन करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं, यदि आपकी व्रत परंपरा इसकी अनुमति देती है।
  • पूजा-पाठ के साथ संयमित व्यवहार और सेवा भावना बनाए रखें।
  • स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर उपवास न करें और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लें।

व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और आत्मसंयम है। अपनी शारीरिक स्थिति के अनुरूप ही उपवास करना उचित है।

12 अक्टूबर को कौन-सा रंग पहनें?

नवरात्रि के रंगों की परंपरा में दूसरे दिन सफेद रंग का उल्लेख मिलता है। सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सरलता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु चाहें तो पूजा के समय सफेद वस्त्र पहन सकते हैं। हालांकि, पूजा के लिए किसी विशेष रंग के वस्त्र पहनना सभी परंपराओं में अनिवार्य नहीं है। <Cite refs={[“turn917221news9″,”turn917221search2”]}/>

नवरात्रि स्पेशल: मां ब्रह्मचारिणी से मिलने वाली प्रेरणा

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप भक्तों को कठिन समय में धैर्य रखने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा-पाठ के साथ अपने व्यवहार में संयम, विचारों में सकारात्मकता और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखने का संकल्प भी लिया जा सकता है।

निष्कर्ष: 12 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। भक्त सुबह स्नान करके पूजा स्थल तैयार कर सकते हैं, दीपक जलाकर माता को फूल और भोग अर्पित कर सकते हैं तथा “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं। पूजा-विधि और व्रत की परंपराएं परिवार तथा क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *