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Assembly Elections 2027 · October 4, 2026 · admin

लखनऊ: सपा के 34 साल पूरे होने पर BJP का तंज, पंकज चौधरी ने हथौड़ी से तोड़ा ‘पाप का घड़ा’

लखनऊ में सपा के 34 साल पूरे होने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने प्रतीकात्मक रूप से तोड़ा पाप का घड़ा

भाजपा प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सपा के शासनकाल पर लगाए आरोप, 34 घटनाओं और विवादों का ब्योरा पेश कर अखिलेश यादव की पार्टी को घेरा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के स्थापना के 34 साल पूरे होने पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार को तीखी बयानबाजी देखने को मिली। सपा के स्थापना दिवस के मौके पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विपक्षी दल पर निशाना साधा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस दौरान प्रतीकात्मक रूप से हथौड़ी से ‘सपा के पाप का घड़ा’ तोड़ा। घड़े पर यही संदेश लिखा हुआ था। भाजपा ने इस कार्यक्रम के जरिए सपा के राजनीतिक इतिहास और उसके शासनकाल से जुड़ी घटनाओं को लेकर सवाल उठाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंकज चौधरी ने सपा के 34 साल के राजनीतिक सफर को लेकर कई आरोप लगाए। भाजपा की ओर से चार पेज का एक ब्रोशर भी जारी किया गया, जिसमें पार्टी ने 1994 से लेकर अब तक की 34 घटनाओं और विवादों का उल्लेख किया। भाजपा ने इन मामलों को सपा के शासनकाल की कथित नाकामियों, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के रूप में पेश किया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सपा के शासनकाल में विकास कार्यों की तुलना में विवाद और कांड अधिक चर्चा में रहे। उन्होंने पार्टी के पुराने कार्यकालों और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार पर भी सवाल उठाए। भाजपा ने अपने आरोपों के समर्थन में कई चर्चित घटनाओं और सरकारी योजनाओं का जिक्र किया।

रामपुर तिराहा और गेस्ट हाउस कांड का किया जिक्र

भाजपा की ओर से जारी ब्रोशर में 1994 के रामपुर तिराहा कांड और 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को प्रमुखता से शामिल किया गया। पंकज चौधरी ने इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाए।

रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। वहीं, लखनऊ का गेस्ट हाउस कांड 1995 में बसपा प्रमुख मायावती और उनके सहयोगियों पर हुए हमले की घटना के रूप में जाना जाता है। भाजपा ने इन दोनों मामलों को सपा के राजनीतिक इतिहास से जोड़ते हुए अपने आरोपों का आधार बनाया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का भी जिक्र किया गया। भाजपा ने दंगों में हुई मौतों और विस्थापन का हवाला देकर तत्कालीन सपा सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। इन घटनाओं को लेकर भाजपा ने सपा से जवाबदेही की मांग की।

भ्रष्टाचार और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी निशाना

पंकज चौधरी ने सपा सरकारों के कार्यकाल से जुड़ी कई परियोजनाओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए। भाजपा के ब्रोशर में गोमती रिवरफ्रंट परियोजना, यादव सिंह प्रकरण, जेपीएनआईसी, शिक्षक भर्ती, यूपीपीसीएस परीक्षा और जल निगम भर्ती जैसे मामलों का उल्लेख किया गया।

भाजपा ने इन मामलों को भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों के संदर्भ में पेश किया। इसके अलावा पार्टी ने बेरोजगारी भत्ते के प्रचार पर खर्च, मुफ्त लैपटॉप योजना, गन्ना किसानों से जुड़े मुद्दों और यश भारती पुरस्कारों में कथित भाई-भतीजावाद का भी जिक्र किया।

भाजपा का आरोप है कि सपा के शासनकाल में सरकारी योजनाओं और नियुक्तियों को लेकर कई सवाल खड़े हुए। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए आरोप भाजपा के राजनीतिक पक्ष का हिस्सा हैं। प्रत्येक मामले की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति अलग-अलग है, इसलिए इन्हें किसी एक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

परिवारवाद को लेकर अखिलेश यादव पर हमला

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने समाजवादी पार्टी में परिवारवाद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सपा के नेतृत्व और राजनीतिक फैसलों को लेकर सवाल किए। भाजपा ने आरोप लगाया कि पार्टी में परिवार के सदस्यों को राजनीतिक महत्व दिया जाता रहा है।

पंकज चौधरी ने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकारों का जिक्र करते हुए सपा के राजनीतिक ढांचे पर निशाना साधा। भाजपा की ओर से 2016 में सपा के भीतर हुए पारिवारिक और राजनीतिक विवाद का भी उल्लेख किया गया।

भाजपा ने अपने ब्रोशर में कैराना पलायन, सहारनपुर और बदायूं की घटनाओं, जवाहर बाग कांड तथा अन्य विवादों को भी शामिल किया। पार्टी का कहना है कि इन घटनाओं को लेकर सपा को जनता के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए।

स्थापना दिवस पर सियासी संदेश देने की कोशिश

समाजवादी पार्टी के 34वें स्थापना दिवस के मौके पर भाजपा की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस राजनीतिक संदेश देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। भाजपा ने सपा के पुराने शासनकाल से जुड़े विवादों को सामने रखकर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल को घेरने की कोशिश की।

‘पाप का घड़ा’ तोड़ने का प्रतीकात्मक कार्यक्रम भाजपा के हमलावर राजनीतिक रुख को दर्शाता है। पार्टी ने कहा कि सपा को अपने शासनकाल से जुड़े मामलों पर जवाब देना चाहिए। वहीं, सपा की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

फिलहाल प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों और जारी ब्रोशर के जरिए भाजपा ने सपा के 34 साल के राजनीतिक सफर को चुनावी बहस का मुद्दा बनाने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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