सुलतानपुर के हलियापुर में अष्टमी से पूर्णिमा तक चलेगा दुर्गा पूजा महोत्सव, 15 दिनों से जुटे कारीगर; विसर्जन यात्रा में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
सुलतानपुर: शारदीय नवरात्र के साथ ही सुलतानपुर जिले के हलियापुर क्षेत्र में मां दुर्गा की भक्ति का रंग गहराने लगा है। कस्बे में भव्य पंडालों और विशाल प्रतिमाओं को तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। इस बार करीब 100 फीट ऊंचे पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनने जा रहे हैं। धार्मिक आयोजन, विशाल भंडारा और गाजे-बाजे के साथ निकलने वाली विसर्जन यात्रा हलियापुर की दुर्गा पूजा को खास पहचान देते हैं।
हलियापुर थाना क्षेत्र के दर्जनों गांवों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। यहां अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा तक पूजा महोत्सव चलता है। इस दौरान श्रद्धालु दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। विसर्जन के दिन अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर मां दुर्गा को विदाई देते हैं।
दो प्रमुख समितियां तैयार कर रहीं भव्य पंडाल
हलियापुर कस्बे में दो प्रमुख स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इनमें दुर्विजयगंज चौराहे की नव दुर्गा पूजा समिति और शिवाला मंदिर स्थित मां वैष्णो दुर्गा पूजा समिति शामिल हैं।
दोनों समितियों के पंडालों को भव्य रूप देने के लिए पिछले करीब 15 दिनों से कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं। करीब 100 फीट ऊंचे पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। इनके निर्माण में क्षेत्रवासी भी सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीण स्वेच्छा से चंदा देकर तैयारियों में योगदान दे रहे हैं।
अष्टमी से पूर्णिमा तक भक्ति और धार्मिक आयोजन
हलियापुर में दुर्गा पूजा महोत्सव अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलता है। पूजा समितियों की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। रात में भक्ति नाट्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
शिवाला मंदिर स्थित पंडाल से निकलने वाली विसर्जन यात्रा विशेष आकर्षण रहती है। इसमें रथ, रोड लाइट और गाजे-बाजे की व्यवस्था की जाती है। मां के जयकारों के बीच श्रद्धालु यात्रा में शामिल होते हैं और नम आंखों से मां को विदाई देते हैं।
तिरहुत मोड़ से गौहनिया मोड़ तक दिखेगा आस्था का नजारा
हलियापुर की विसर्जन यात्रा देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचते हैं। तिरहुत मोड़ थाना चौराहे से कांकरकोला और गौहनिया मोड़ तक सड़क के दोनों किनारों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और अन्य लोग मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए कतारों में खड़े होते हैं।
रथ, रोशनी और गाजे-बाजे के बीच गूंजते जयकारे पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में बदल देते हैं। विसर्जन के बाद गोमती नदी के तट पर नाव के माध्यम से प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस दौरान घाट पर श्रद्धालुओं की मौजूदगी और मां की विदाई का भावुक दृश्य देखने को मिलता है।
विसर्जन यात्रा को लेकर सुरक्षा की तैयारी
श्रद्धालुओं की भीड़ और विसर्जन यात्रा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गोमती नदी के घाट पर विसर्जन के दौरान अमेठी, सुलतानपुर समेत विभिन्न थानों की पुलिस फोर्स तैनात रहती है।
हलियापुर के थानाध्यक्ष अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि थाना क्षेत्र में प्रतिमा स्थापना वाले स्थानों की निगरानी की जा रही है। इसके लिए रजिस्टर मेंटेन करने के साथ प्रतिमाओं की गणना भी की जा रही है। पूजा समितियों के सदस्यों के साथ बैठकें कर सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जा रही है।
आस्था, परंपरा और सामूहिक सहयोग का प्रतीक
हलियापुर की दुर्गा पूजा सिर्फ भव्य पंडालों और विशाल प्रतिमाओं तक सीमित नहीं है। इसमें ग्रामीणों का सामूहिक सहयोग, धार्मिक आयोजन और विसर्जन यात्रा में लोगों की भागीदारी भी अहम भूमिका निभाती है। अष्टमी से पूर्णिमा तक चलने वाला यह महोत्सव क्षेत्र की धार्मिक परंपरा और सामाजिक एकजुटता को दर्शाता है।
इस बार भी श्रद्धालुओं को भव्य पंडालों, मां दुर्गा के दर्शन, भंडारे और धार्मिक कार्यक्रमों का इंतजार है। वहीं विसर्जन के दिन हजारों भक्तों के जयकारों के बीच मां दुर्गा की विदाई हलियापुर की परंपरा का प्रमुख आकर्षण बनेगी।



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