अधिकारी की गैरमौजूदगी से ग्रामीण परेशान, पंचायत से जुड़े कामों के लिए दूर-दराज से पहुंच रहे लोगों को करना पड़ रहा इंतजार
अमेठी ब्लॉक ADO पंचायत कार्यालय में अधिकारी की लगातार गैरमौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। फरियादियों के मुताबिक अधिकारी न मिलने पर उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।विकासखंड अमेठी में ADO पंचायत अनुराग यादव की लगातार गैरमौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। पंचायत से जुड़े काम, शिकायत और जरूरी कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने वाले फरियादियों को अधिकारी के कार्यालय में खाली कुर्सी मिलने के बाद वापस लौटना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी के नियमित रूप से कार्यालय में मौजूद नहीं रहने की समस्या नई नहीं है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
खाली कुर्सी देखकर लौट रहे फरियादी
दूर-दराज के गांवों से ग्रामीण अपनी शिकायतों और पंचायत से जुड़े कामों के लिए ब्लॉक कार्यालय पहुंचते हैं। एडीओ पंचायत से संबंधित काम होने पर जब वे अधिकारी के कक्ष तक पहुंचते हैं तो वहां अक्सर उन्हें खाली कुर्सी मिलती है। ग्रामीणों के मुताबिक, अधिकारी कब कार्यालय आएंगे या उनसे कब मुलाकात हो सकेगी, इसकी स्पष्ट जानकारी देने वाला भी कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं मिलता। ऐसे में लोगों को बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ता है।

सुनीता ने बताया- काफी देर इंतजार के बाद लौटना पड़ा
ग्रामीण सुनीता के मुताबिक वह अपनी समस्या लेकर एडीओ पंचायत कार्यालय पहुंची थीं। काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद अधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली थी। कर्मचारियों से अधिकारी के आने के समय के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा।
‘जरूरी काम के लिए आई थी, लेकिन अधिकारी नहीं मिले’
मधु मिश्रा ने बताया कि वह जरूरी काम से एडीओ पंचायत से मिलने ब्लॉक पहुंची थीं, लेकिन अधिकारी मौजूद नहीं थे। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारियों से जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों को छोटे-छोटे काम के लिए भी कई बार ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं आशीष का कहना है कि ग्रामीण दूर के गांवों से समय और पैसा खर्च करके ब्लॉक मुख्यालय पहुंचते हैं। यदि अधिकारी कार्यालय में मौजूद न मिलें तो उन्हें दोबारा आना पड़ता है।
सवाल-अधिकारी की अनुपस्थिति की निगरानी कौन करता है?
ग्रामीणों ने अधिकारी के क्षेत्रीय कार्य या बैठकों में व्यस्त रहने की संभावना को अलग विषय बताते हुए कहा कि यदि किसी दिन अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं तो फरियादियों को इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि एडीओ पंचायत कार्यालय में मौजूद नहीं रहते हैं तो उनकी अनुपस्थिति की निगरानी कौन करता है? साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि अधिकारी की गैरमौजूदगी में पंचायत से जुड़े जरूरी कार्यों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जाती, ताकि दूर से आने वाले ग्रामीणों को खाली हाथ वापस न लौटना पड़े।

BDO और उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी और संबंधित उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि एडीओ पंचायत की कार्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। साथ ही अधिकारी की अनुपस्थिति में संबंधित कार्यों के लिए किसी वैकल्पिक जिम्मेदार कर्मचारी की व्यवस्था की जाए, जिससे ग्रामीणों को बार-बार ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
अधिकारी का पक्ष उपलब्ध नहीं
इस मामले में एडीओ पंचायत अनुराग यादव का पक्ष जानने के लिए संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका। The Public Lens संबंधित अधिकारी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल करेगा।



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