अमेठी जिला उद्योग बंधु बैठक। अमेठी जिले में औद्योगिक विकास को गति देने, निवेशकों की समस्याओं का समाधान करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए प्रशासन ने प्रयास तेज किए हैं। जिलाधिकारी शशांक चौधरी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला उद्योग बंधु समिति की बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं, निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित प्रकरणों, निवेश समझौतों और स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षा की गई। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि उद्यमियों और व्यापारियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण किया जाए, ताकि उद्योगों के संचालन और नए निवेश की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं न आएं।
अमेठी जिला उद्योग बंधु बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं की स्थिति से लेकर विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि उद्यमियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और उनके समाधान के लिए विभागों के बीच समन्वय बनाए रखा जाए। प्रशासन की ओर से औद्योगिक इकाइयों के अनुकूल माहौल तैयार करने और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुगम बनाने पर जोर दिया गया।
औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी पर चर्चा
जिला उद्योग बंधु समिति की बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में आवंटित भूखंडों से अवैध कब्जे हटाने, सड़कों और नालियों के पुनर्निर्माण, साफ-सफाई, पार्किंग व्यवस्था तथा विद्युत कनेक्शन से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। इन समस्याओं का समाधान औद्योगिक इकाइयों के नियमित संचालन और उद्यमियों की जरूरतों से जुड़ा है।
जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन समस्याओं के निस्तारण के लिए समयसीमा के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करने और उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान कराने पर भी जोर दिया।
बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विभागीय समन्वय से जुड़े मामलों को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए गए, जिससे उद्यमियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
निवेश मित्र पोर्टल के लंबित मामलों के जल्द निस्तारण के निर्देश
निवेश मित्र पोर्टल पर प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने लंबित मामलों को शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया में निवेशकों को विभिन्न विभागों से संबंधित अनावश्यक कठिनाइयों का सामना नहीं करना चाहिए।
डीएम ने निर्देश दिया कि यदि किसी निवेशक या उद्यमी को किसी विभाग से संबंधित समस्या आती है, तो उसे जिला उद्योग बंधु समिति के संज्ञान में लाया जाए। इससे संबंधित विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर समस्या के समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रयास किया जा सकेगा।
बैठक में उद्यमियों की सुरक्षा और औद्योगिक विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करने पर भी जोर दिया गया। प्रशासन की मंशा है कि विभागीय प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों का समय पर समाधान हो और निवेशकों को उद्योग स्थापित करने तथा संचालित करने में आने वाली दिक्कतों को दूर किया जा सके।
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार और ओडीओपी योजनाओं की समीक्षा
बैठक में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए संचालित योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान शामिल रहे।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने पर भी जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक पात्र युवाओं और उद्यमियों तक इनकी जानकारी पहुंच सके और वे उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आ सकें।
स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षा का उद्देश्य पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ने और जिले में उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों को गति देना है। हालांकि, बैठक में इन योजनाओं के तहत अब तक लाभान्वित युवाओं की संख्या, स्वीकृत ऋण या लक्ष्यपूर्ति के आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए।
एमओयू के क्रियान्वयन से निवेश बढ़ाने पर जोर
बैठक में निवेशकों के साथ हुए समझौता ज्ञापनों यानी एमओयू के क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए संबंधित विभागों को सक्रिय भूमिका निभाने और बड़ी औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए।
एमओयू के क्रियान्वयन की समीक्षा का उद्देश्य निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने और औद्योगिक विकास से जुड़ी प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि निवेश से संबंधित मामलों में विभागीय स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जाए, जिससे जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाएं मजबूत हों।
हालांकि, बैठक में एमओयू की कुल संख्या, प्रस्तावित निवेश की राशि या परियोजनाओं के शुरू होने की निश्चित समयसीमा का विवरण उपलब्ध नहीं है।
उद्यमियों ने उठाईं विभागीय समस्याएं
बैठक के दौरान सीटेड संस्था के निदेशक संजय सिंह ने औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को आ रही समस्याओं को उठाया। उन्होंने यूपीसीडा, उद्योग, बैंकिंग, विद्युत, श्रम और एआरटीओ समेत संबंधित विभागों की योजनाओं का प्रचार-प्रसार कराने की जरूरत बताई। साथ ही उद्यमियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने पर जोर दिया।
बैठक का संचालन उपायुक्त उद्योग एवं जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के उपायुक्त संजय कुमार तिवारी ने किया। उन्होंने पिछली बैठक की कार्यवाही और वर्तमान बैठक के एजेंडा बिंदु प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू, प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और उद्यमी मौजूद रहे।
जिला उद्योग बंधु समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद अब औद्योगिक क्षेत्रों की सुविधाओं, निवेश मित्र पोर्टल के लंबित प्रकरणों, स्वरोजगार योजनाओं और एमओयू के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों में संबंधित विभागों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन ने समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया है। इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है, यह संबंधित मामलों में आगे होने वाली प्रगति से स्पष्ट होगा।



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