CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान; हिरासत और दिल्ली में यातायात प्रतिबंधों से जुड़ी याचिकाओं पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में जारी CJP का आंदोलन अब अनिश्चितकालीन करने का ऐलान किया गया है। संगठन के नेताओं के मुताबिक, आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त इस्तीफा नहीं देते। शनिवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और दिल्ली में यातायात प्रतिबंधों को लेकर भी विवाद सामने आया। अब रविवार को सुप्रीम कोर्ट में इनसे जुड़े मामलों पर सुनवाई होनी है।
सोमवार को जंतर-मंतर पर फिर जुटेंगे CJP कार्यकर्ता
CJP के नेताओं ने घोषणा की है कि उनके कार्यकर्ता रविवार के बाद सोमवार को भी दिल्ली में आंदोलन जारी रखेंगे और जंतर-मंतर की ओर कूच करेंगे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। संगठन निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। अधिकारियों ने अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था की चिंताओं का हवाला दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शन को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। शनिवार को कई प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं।
विपक्षी दलों के सोमवार के मार्च की चर्चा
प्रदर्शन को व्यापक स्वरूप देने के लिए विपक्षी दलों की ओर से सोमवार को संसद से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी की बात कही गई है। साझा किए गए कार्यक्रम के मुताबिक, विपक्षी सांसद और नेता निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि, इस प्रस्तावित मार्च में शामिल होने वाले सभी दलों और नेताओं की अंतिम भागीदारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के शामिल होने की चर्चा
प्रस्तावित मार्च को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के दिल्ली पहुंचने की बात भी सामने आई है। साझा जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल लौटने का अपना कार्यक्रम बदल दिया है, जबकि अभिषेक बनर्जी के कोलकाता से दिल्ली आने की बात कही गई है।
विपक्षी दलों की ओर से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी सोमवार के आंदोलन में शामिल होने की अपील किए जाने की जानकारी दी गई है। यदि समाजवादी पार्टी इसमें भाग लेती है, तो उत्तर प्रदेश से पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ सकती है। इन नेताओं की अंतिम मौजूदगी की पुष्टि कार्यक्रम के दिन की जानी होगी।
हिरासत और यातायात प्रतिबंधों पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों और सार्वजनिक परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और मेट्रो व रेल सेवाओं पर प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में रविवार, 11 अक्टूबर को विशेष सुनवाई निर्धारित है। एक याचिका में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 9 अक्टूबर को अदालत की ओर से सार्वजनिक परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाने के निर्देश के बावजूद मेट्रो सेवाओं और ट्रेनों पर व्यापक रोक लगाई गई। यह आरोप अभी न्यायिक विचाराधीन है।
प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की परेशानी पर सवाल
इस पूरे विवाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और आम नागरिकों की आवाजाही के बीच संतुलन भी अहम मुद्दा बन गया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि लोगों को उनके घरों से हिरासत में लेने और सार्वजनिक परिवहन प्रभावित करने से उनके अधिकारों पर असर पड़ा।
वहीं, प्रशासन की ओर से प्रदर्शन की अनुमति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं उठाई गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले की सुनवाई में स्पष्ट किया था कि प्रदर्शन के अधिकार और आम जनता को होने वाली असुविधा के बीच संतुलन जरूरी है। अदालत ने सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह रोकने के बजाय उसे नियंत्रित करने और नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाने पर जोर दिया था।
अब रविवार की सुनवाई और सोमवार को प्रस्तावित राजनीतिक मार्च पर सबकी नजर रहेगी। अदालत का रुख, प्रदर्शन की अनुमति और विपक्षी नेताओं की भागीदारी आगे की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण होगी।



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