नई दिल्ली/गुरुग्राम: यूट्यूबर ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया है कि उन्हें गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया, बल्कि उनके घर से किडनैप किया गया था। उन्होंने अपने बयान में भारतीय पासपोर्ट दिखाते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं और संविधान ने उन्हें विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार दिया है।
ध्रुव राठी का यह बयान 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले गुरुग्राम स्थित उनके आवास से ले जाए जाने की घटना के बाद आया है। 11 अक्टूबर को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राठी ने वीडियो में आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में आए लोग उन्हें घर से ले गए। वहीं, पुलिस की कार्रवाई को मीडिया रिपोर्टों में हिरासत के रूप में बताया गया है। इस मामले में राठी के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के विवरण को अलग-अलग समझना जरूरी है।
ध्रुव राठी ने X पर क्या कहा?
ध्रुव राठी ने अपने बयान में कहा, “मुझे किडनैप किया गया। मैं कोई हिरासत में नहीं था और न मुझे गिरफ्तार किया गया। मेरे घर से मेरी किडनैपिंग हुई। मैं भारतीय पासपोर्ट धारक हूं। भारतीय नागरिक हूं और संविधान ने मुझे प्रोटेस्ट के अधिकार दिए हैं।”
राठी ने अपने वीडियो में भारतीय पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उन्हें घर से ले जाने वाले लोगों ने अपनी पहचान स्पष्ट नहीं की और उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि किस कानूनी आधार पर उन्हें ले जाया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राठी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें घर से ले जाते समय चोटें आईं और उन्हें वकील से संपर्क करने का अवसर नहीं दिया गया। ये आरोप उनके बयान पर आधारित हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
प्रदर्शन से पहले गुरुग्राम स्थित घर से ले जाए जाने का मामला
रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटनाक्रम 10 अक्टूबर की सुबह हुआ, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन होना था। प्रदर्शन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जानी थी। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में थी।
ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में दावा किया कि सुबह उनके घर में सादे कपड़ों में कई लोग दाखिल हुए और उन्हें अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि वह उस समय सो रहे थे। कुछ रिपोर्टों में उनके बयान के हवाले से करीब 20 लोगों के घर में दाखिल होने की बात कही गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राठी को बाद में छोड़ दिया गया और उनके परिवार को सौंप दिया गया। पुलिस की कार्रवाई को हिरासत के रूप में बताया गया, जबकि राठी ने इसे किडनैपिंग करार दिया। दोनों विवरणों के बीच का यह अंतर इस मामले की रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण है।
नागरिकता और प्रदर्शन के अधिकार पर उठाए सवाल
अपने बयान में ध्रुव राठी ने भारतीय पासपोर्ट दिखाते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने प्रदर्शन में भाग लेने और अपनी बात रखने के अधिकार का भी उल्लेख किया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनकी नागरिकता और भारत में राजनीतिक प्रदर्शन में भाग लेने को लेकर सार्वजनिक चर्चा हो रही थी।
हालांकि, किसी व्यक्ति की नागरिकता, भारत में उसकी कानूनी स्थिति और किसी विशेष प्रदर्शन में भाग लेने की अनुमति अलग-अलग कानूनी प्रश्न हो सकते हैं। इन मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। संबंधित दस्तावेजों, लागू कानूनों और सक्षम अधिकारियों के तथ्यों को देखना जरूरी होता है।
राठी ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह देश से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उनके बयान के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हुई है।
मामले में क्या स्पष्ट है और क्या आरोप हैं?
अब तक उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों से इतना सामने आता है कि ध्रुव राठी को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले गुरुग्राम स्थित उनके आवास से ले जाया गया था और बाद में छोड़ दिया गया। राठी ने कार्रवाई के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे किडनैपिंग कहा है। दूसरी ओर, पुलिस कार्रवाई का वर्णन रिपोर्टों में हिरासत के रूप में किया गया है।
राठी द्वारा लगाए गए आरोपों—जैसे पहचान न बताने, चोट लगने और वकील से संपर्क नहीं करने देने—की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष इस खबर में उपलब्ध सामग्री से स्थापित नहीं होता। इसलिए इन दावों को उन्हीं के बयान के रूप में देखना चाहिए।
यह मामला अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है। इसमें पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया, नागरिक अधिकारों और प्रदर्शन से जुड़े सवाल शामिल हैं। आगे की स्थिति संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान, उपलब्ध दस्तावेजों और किसी भी स्वतंत्र जांच या न्यायिक कार्यवाही से स्पष्ट हो सकेगी।



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