नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश भर में चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया है। आयोग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन मतदाताओं के डेटा में अन्मैप्ड (Unmapped) या तार्किक विसंगतियां (Logical Discrepancies) पाई गई हैं, उन्हें अब इलेक्शन ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बीएलओ (BLO) खुद उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें सिस्टम पर अपलोड करेंगे।
आयोग के 9 बड़े फैसले और नई व्यवस्थाएं
1. घर बैठे निस्तारण और ऑनलाइन सुनवाई
- घर-घर सत्यापन: नोटिस पाने वाले मतदाताओं के घर BLO जाकर दस्तावेज लेंगे और ECINet पर सीधे अपलोड करेंगे।
- ऑफिस बुलाने पर रोक: मतदाताओं को ERO या AERO कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।
- ऑनलाइन सुनवाई: केवल असाधारण मामलों में ही ERO के स्तर पर सुनवाई होगी, जो प्राथमिक रूप से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। इसमें परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य अधिकृत होकर शामिल हो सकता है।
2. बेघर, श्रमिकों और कमजोर वर्गों के लिए विशेष शिविर
- जिला निर्वाचन अधिकारी (DEOs) रैन बसेरों, असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों, गरीबों और बेघरों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए विशेष हेल्प डेस्क और शिविर लगाएंगे।
3. दिल्ली और महाराष्ट्र में तिथियों का विस्तार
आयोग ने दो राज्यों में दावों और आपत्तियों के निस्तारण की अंतिम तिथि आगे बढ़ा दी है:
- दिल्ली: दावे/आपत्तियां दर्ज कराने की तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक और निस्तारण की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
- महाराष्ट्र: दावे/आपत्तियां दर्ज करने की समय-सीमा 12 अक्टूबर 2026 और निस्तारण 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।
4. छूटे हुए मतदाताओं के लिए विशेष अभियान (20 राज्य/UTs)
- बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है।
- जो युवा या पात्र नागरिक सूची में शामिल होने से छूट गए हैं, उनके लिए फॉर्म 6 (Form 6) के माध्यम से ‘निरंतर अद्यतन प्रक्रिया’ (Continuous Updation) के तहत विशेष अभियान तुरंत शुरू किया जाएगा। (उदाहरण स्वरूप: गोवा में छूटे 97 में से 81 नागरिकों ने फॉर्म 6 भर दिया है)
5. ECINet पोर्टल की समीक्षा और IT सुधार
- ECINet की क्षमता और तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (DEC) और IIT/IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञों की एक संयुक्त समिति बनाई गई है।
- भविष्य में IT से जुड़ी किसी भी नई पहल को लागू करने से पहले ‘अधिकारियों की समिति’ (COO) में चर्चा अनिवार्य होगी।
6. कानूनी स्थिति व सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- SIR की पूरी प्रक्रिया आयोग की सर्वसम्मति से शुरू की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने आदेश द्वारा सही ठहराया है।
- SIR में फॉर्म 6 से जुड़े घोषणापत्र (Declaration) की वैधता को शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा है।
7. प्रशासनिक पारदर्शिता और आंतरिक सुधार
- आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले से तय कर मिनट्स (Minutes) जारी किए जाएंगे।
- अधिकारियों के विदेश दौरों के लिए आयोग की पूर्व-मंजूरी अनिवार्य होगी।
- अधिकारियों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट (APARs) हर साल 31 दिसंबर तक पूरी करनी होगी।
8. कैबिनेट सचिव को पत्र पर स्पष्टीकरण
- आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था, न कि IT प्रभाग के नीतिगत मामलों से। DEC द्वारा IT प्रभाग की निगरानी वापस लेने जैसी खबरें भ्रामक हैं।


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