गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)। सोशल मीडिया की लत, छोटी-छोटी बात पर जेल भेजने की धमकियां और शादी टूटने की कगार पर पहुंचे रिश्ते… गाजियाबाद जिला न्यायालय परिसर शनिवार को कुछ ऐसे ही पारिवारिक ड्रामों और भावुक कर देने वाले पलों का गवाह बना। अवसर था राष्ट्रीय लोक अदालत का, जहाँ कानूनी लड़ाइयों के बीच उलझे 15 ऐसे दंपतियों की जिंदगी में नया मोड़ आया, जिन्होंने अपने सारे गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे का हाथ दोबारा थाम लिया।
जनपद न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नीरज कुमार गौतम के निर्देशन में आयोजित इस लोक अदालत में कुल 48,878 वादों का निस्तारण किया गया, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उन 184 पारिवारिक मामलों की रही जिनमें सालों से जारी दुश्मनी चंद मिनटों में प्यार में बदल गई।
वॉट्सऐप-इंस्टाग्राम ने बिगाड़ा खेल, बेटे की एक झलक ने पिघलाया दिल
पहला मामला बुलंदशहर निवासी युवक और प्रताप विहार (गाजियाबाद) की युवती का था, जिनकी शादी 23 नवंबर 2024 को हुई थी।
- विवाद की वजह: वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम चलाने को लेकर पति-पत्नी में विवाद इतना गहराया कि मामला गाली-गलौज और कोर्ट-कचहरी तक पहुंच गया। पत्नी ने पति को सलाखों के पीछे भिजवाने की धमकी दे दी, जिसके बाद गुस्साए पति ने सीधे कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी।
- लोक अदालत में ट्विस्ट: शनिवार को लोक अदालत के कटघरे में जब दोनों आमने-सामने आए, तो पत्नी अपने मासूम बेटे को देखकर भावुक होकर फूट-फूटकर रोने लगी। मध्यस्थता और काउंसलिंग के बाद दोनों को अपनी गलती का अहसास हुआ और दोनों ने तलाक की अर्जी वापस लेकर साथ रहने का फैसला किया।
‘मारकर ड्रम में भर दूंगी’, पत्नी की इस खौफनाक धमकी से डरा था पति!
दूसरा चौंकाने वाला मामला खोड़ा इलाके का था, जहाँ के निवासी युवक की शादी 22 नवंबर 2020 को दिल्ली की युवती से हुई थी।
- पति के संगीन आरोप: पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी उसके साथ बेहद अभद्र व्यवहार करती थी और बात-बात पर उसे जान से मारने तथा उसकी हत्या कर शव को ड्रम में बंद करने की धमकी देती थी। इस खौफनाक बर्ताव से डरकर पति ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
- समझौता: लोक अदालत में जजों और काउंसलरों की समझाइश काम आई। दोनों ने माना कि गुस्से में कही गई बातों ने रिश्ते को जहर बना दिया था। आखिरकार दोनों ने अपनी पुरानी गलतियों की माफी मांगी और एक साथ नए सिरे से गृहस्थी बसाने की कसम खाई।
चालान ई-सेवा केंद्र पर भारी भीड़, पुलिस को संभालना पड़ा मोर्चा
लोक अदालत में पहली बार ई-सेवा केंद्र के जरिए ट्रैफिक चालान का ऑनलाइन सत्यापन कराने और कोर्ट आवंटित करने की नई व्यवस्था लागू की गई थी। हालांकि, उम्मीद से ज्यादा भीड़ पहुंचने के कारण ई-सेवा केंद्र का सिस्टम चरमरा गया।
- हंगामा और धक्का-मुक्की: चालान जमा करने आए लोगों की भारी भीड़ के कारण केंद्रों पर अव्यवस्था फैल गई और लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया।
- पुलिस की एंट्री: स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद पुलिस बल को हस्तक्षेप करना पड़ा और कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित कर कतारबद्ध कराया गया।
लोक अदालत के आंकड़े: एक नजर में
- कुल निस्तारित वाद: 48,878
- सुलह योग्य मामले: 48,698
- पारिवारिक विवादों का निस्तारण: 184 (15 दंपति फिर से एक हुए)
- कुल वसूला गया अर्थदंड (फाइन): ₹1,95,91,295 (एक करोड़ पिचानवे लाख से अधिक)
अहंकार, सोशल मीडिया की लत और जल्दबाजी में उठाया गया एक कदम कैसे हंसते-खेलते परिवारों को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा करता है, गाजियाबाद लोक अदालत के ये मामले इसका ज्वलंत उदाहरण हैं।
“ड्रम में भरने की धमकी” और “इंस्टाग्राम पर जेल भेजने का विवाद” सुनने में भले ही अजीब लगें, लेकिन यह समाज में तेजी से घटते बर्दाश्त के स्तर (Tolerance Level) को दर्शाते हैं। लोक अदालत जैसी व्यवस्थाएं न केवल अदालतों से मुकदमों का बोझ कम करती हैं, बल्कि टूटते रिश्तों को एक नई जिंदगी भी देती हैं। 15 परिवारों का दोबारा बसना इस बात का सुबूत है कि अगर बातचीत के दरवाजे खुले रहें और अहं को किनारे रख दिया जाए, तो बड़े से बड़ा पारिवारिक विवाद सुलझाया जा सकता है।


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