अमेठी: जायस स्थित ऐतिहासिक गुरु गोरखनाथ तपोस्थली के पर्यटन विकास कार्य में हो रही देरी को लेकर जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने नाराजगी जताई है। रविवार को निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने मौके पर कम श्रमिक मिलने और निर्माण की धीमी गति पर कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज शर्मा के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में लापरवाही और गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों की प्रगति, मौके पर मौजूद श्रमिकों की संख्या और इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि श्रमिकों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए, ताकि निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके। साथ ही परियोजना की नियमित निगरानी करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी कार्य पूरे कराने पर जोर दिया।
गुरु गोरखनाथ तपोस्थली परियोजना की धीमी प्रगति पर नाराजगी
जायस नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्थित गुरु गोरखनाथ तपोस्थली का विकास राज्य योजना के तहत कराया जा रहा है। इस परियोजना की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपी गई है। निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर श्रमिकों की कम संख्या और काम की धीमी रफ्तार सामने आने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई।
डीएम ने कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना की प्रगति पर नियमित नजर रखी जाए। निर्धारित समयसीमा को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जाए। प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज शर्मा के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी इसी कार्रवाई का हिस्सा हैं।
2391.89 लाख रुपये की लागत से हो रहा विकास
गुरु गोरखनाथ तपोस्थली के पर्यटन विकास की स्वीकृत लागत 2391.89 लाख रुपये है, जो करीब 23.92 करोड़ रुपये होती है। परियोजना का निर्माण मार्च 2023 में शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
परियोजना का उद्देश्य इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना है, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इसके तहत परिसर में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार की जानी हैं।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना की वास्तविक प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। निर्माण कार्यों को स्वीकृत योजना के अनुरूप पूरा कराने के साथ निर्धारित समयसीमा का भी ध्यान रखा जाए।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्माण स्थल पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री के नमूने लेकर निर्धारित मानकों के अनुसार जांच कराने के निर्देश दिए। इस संबंध में उप जिलाधिकारी तिलोई अरुणिमा श्रीवास्तव को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
डीएम ने स्पष्ट किया कि सभी निर्माण कार्य स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर के अनुरूप होने चाहिए। तकनीकी मानकों का पालन करना और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी है। यदि जांच में गुणवत्ता से जुड़ी कोई कमी सामने आती है, तो उसके लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।
निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परियोजना निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
प्रवेश द्वार से सत्संग हॉल तक विकसित होंगी सुविधाएं
गुरु गोरखनाथ तपोस्थली के विकास के तहत परिसर में कई तरह की सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। इनमें मुख्य प्रवेश द्वार, बैठने का क्षेत्र, ओपन एयर थिएटर, प्रतिमा चबूतरा, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग और बाउंड्री वॉल जैसे निर्माण कार्य शामिल हैं।
इसके अलावा रेड सैंड स्टोन पाथवे, गजीबो, शौचालय, पेयजल सुविधा और बाहरी विद्युतीकरण की व्यवस्था भी परियोजना का हिस्सा है। परिसर में सत्संग हॉल, म्यूरल वॉल, स्टोन बेंच और साइनेज से जुड़े कार्य भी प्रस्तावित हैं। तालाब स्थल का विकास भी इसी योजना के तहत किया जाना है।
इन सुविधाओं का उद्देश्य धार्मिक स्थल पर आने वाले लोगों के लिए परिसर को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है। परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को बैठने, पेयजल, शौचालय और परिसर में आवागमन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
समयसीमा में काम पूरा कराने पर जोर
जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने गुरु गोरखनाथ तपोस्थली को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने, परियोजना की प्रगति की समीक्षा करने और कार्यदायी संस्था के साथ समन्वय बनाकर निर्माण कार्य समय से पूरा कराने के निर्देश दिए।
डीएम ने साफ किया कि निर्माण कार्य में देरी, लापरवाही या गुणवत्ता से जुड़ी कमियों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। श्रमिकों की संख्या बढ़ाने, निर्माण सामग्री की जांच कराने और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
निरीक्षण के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष मनीषा, उप जिलाधिकारी तिलोई अरुणिमा श्रीवास्तव, तहसीलदार अभिषेक यादव, कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि और नगर पालिका परिषद जायस के अधिशासी अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
क्या बोले डीएम शशांक चौधरी?
निर्माण कार्य में देरी पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने, श्रमिकों की संख्या बढ़ाने और काम में तेजी लाने को कहा। अधिकारियों को परियोजना की नियमित निगरानी कर निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा कराने के निर्देश भी दिए गए।



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