विदेश मंत्री ने कहा- आतंक फैलाने वाले को अपने तौर-तरीके सुधारने होंगे, ऐसी स्थिति में समझौतों पर सवाल उठेंगे
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर भारत का स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते। जयशंकर ने यह भी कहा कि आतंकवाद के लिए जिम्मेदार पक्ष को अपने तौर-तरीके सुधारने होंगे और आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में सद्भावना के आधार पर बनी समझ पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे।
UNGA में आतंकवाद पर जयशंकर का संदेश
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखा। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 81वें सत्र की आम बहस 22 से 28 सितंबर 2026 तक आयोजित हो रही है। जयशंकर ने कहा कि ‘Friendship and goodwill cannot co-exist with terrorism’, यानी आतंकवाद के साथ दोस्ती और सद्भावना एक साथ नहीं चल सकती। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में सद्भावना पर आधारित समझ और बातचीत स्वाभाविक रूप से सवालों के घेरे में आएगी।

आतंकवाद फैलाने वाले को तौर-तरीके सुधारने होंगे
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद के लिए जिम्मेदार पक्ष को अपने तौर-तरीके सुधारने होंगे। उनके मुताबिक आतंकवाद को सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जयशंकर ने आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए लगातार बने हुए खतरे के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने खास तौर पर राज्य प्रायोजित और सीमा पार आतंकवाद के संदर्भ में चिंता जताई।
आतंकवाद के रहते समझौतों पर उठेंगे सवाल
जयशंकर ने कहा कि जब आतंकवाद जारी रहता है तो सद्भावना के आधार पर बनी किसी भी समझ या बातचीत की विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। उनका संदेश आतंकवाद और सामान्य संबंधों के बीच भारत की घोषित स्थिति को रेखांकित करता है। संयुक्त राष्ट्र की ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म स्ट्रैटेजी भी आतंकवाद को सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में अस्वीकार्य मानती है और सदस्य देशों के स्तर पर आतंकवाद की रोकथाम तथा मुकाबले के लिए सहयोग पर जोर देती है।


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