कोल्हापुर/नांदणी (महाराष्ट्र)। करीब 13 महीने के लंबे इंतजार, कानूनी लड़ाई और जन-आंदोलन के बाद आखिरकार हथिनी माधुरी (जिसे स्थानीय लोग प्यार से ‘महादेवी’ कहते हैं) अपने घर कोल्हापुर लौट आई है। शनिवार देर रात जब महादेवी महाराष्ट्र के शिरोल तालुका स्थित नांदणी गांव के जैन मठ पहुंची, तो हजारों की संख्या में उमड़े ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर उनका राजसी स्वागत किया।
गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस फाउंडेशन के ‘वनतारा’ (Vantara) एनिमल रेस्क्यू सेंटर से रवाना होकर जब महादेवी ने नांदणी की सीमा में प्रवेश किया, तो पूरा इलाका जयकारों से गूंज उठा।
1992 से जुड़ी है भावनाएं: 700 साल पुरानी मठ की परंपरा
नांदणी स्थित जैन मठ में पिछले करीब 700 वर्षों से हाथी पालने और रखने की धार्मिक परंपरा रही है।
- 32 साल का अटूट रिश्ता: माधुरी को पहली बार 1992 में नांदणी मठ लाया गया था, तब उसकी उम्र महज 4 वर्ष थी।
- वह लगातार 32 वर्षों तक इसी मठ में रही और स्थानीय लोगों की आस्था व भावनाओं का केंद्र बन गई।
- जुलाई 2025 में भेजा गया था वनतारा: हाई पावर कमेटी (HPC) के निर्देशों के बाद जुलाई 2025 में माधुरी के स्वास्थ्य और इलाज का हवाला देकर उसे गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस फाउंडेशन के वनतारा सेंटर भेज दिया गया था।
हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई: विरोध के बाद मिली कामयाबी
महादेवी को गुजरात भेजे जाने का कोल्हापुर और आसपास के क्षेत्रों में भारी विरोध हुआ था। स्थानीय लोगों और जैन मठ प्रशासन ने इसे अपनी आस्था और परंपरा पर कुठाराघात बताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ी।
- मामला बॉम्बे हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
- स्थानीय लोगों के तीखे विरोध और कानूनी याचिकाओं के बाद 9 सितंबर 2026 को हाई पावर कमेटी (HPC) ने स्वयं नांदणी गांव जाकर वहां की व्यवस्थाओं, शेड और देखभाल के इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण किया।
- कमेटी द्वारा नांदणी की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करने के बाद ही माधुरी को वापस कोल्हापुर भेजने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया गया।
वनतारा की रिपोर्ट और High Power Committee (HPC) की सख्त शर्तें
हालांकि महादेवी अपने पुराने घर लौट आई है, लेकिन उसकी सेहत को लेकर हाई पावर कमेटी और वनतारा ने बेहद सख्त गाइडलाइंस और शर्तें तय की हैं:
- स्वास्थ्य स्थिति: वनतारा के डॉक्टरों के अनुसार 13 महीने चले गहन इलाज के बाद महादेवी की हालत अब स्थिर (Stable) है, लेकिन उसकी पुरानी बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पूरी तरह ठीक नहीं हुई हैं।
- जुलूस और आयोजनों पर रोक: माधुरी का इस्तेमाल किसी भी प्रकार के धार्मिक या सामाजिक जुलूस, शोभायात्रा अथवा भारी आयोजनों में सख्त मना है।
- 24×7 देखभाल और मेडिकल चेकअप: मठ परिसर में उसे चौबीसों घंटे विशेष देखभाल में रखा जाएगा और हर 15 दिन में उसका मेडिकल चेकअप अनिवार्य होगा।
- वनतारा की डॉक्टरों की टीम करेगी निगरानी: वनतारा की मेडिकल टीम हर 15 दिन में नांदणी आकर महादेवी के स्वास्थ्य की गहन जांच करेगी और उसकी हेल्थ रिपोर्ट सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपेगी।
क्या आस्था और पशु कल्याण (Animal Welfare) के बीच संतुलन का नया मॉडल बनेगी महादेवी की वापसी?
हथिनी महादेवी (माधुरी) का कोल्हापुर लौटना केवल एक बेजुबान की वापसी नहीं है, बल्कि यह जन-आस्था, 700 साल पुरानी परंपरा और आधुनिक वाइल्डलाइफ गाइडलाइंस के बीच एक संतुलित समझौते की मिसाल है। जामनगर के वनतारा सेंटर में मिले आधुनिक इलाज ने जहां उसके स्वास्थ्य को सुधारा, वहीं कोल्हापुर के लोगों के अटूट जुड़ाव ने उसे अपना घर वापस दिलाया। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी नांदणी जैन मठ और स्थानीय प्रशासन की है कि वे HPC द्वारा तय की गई मेडिकल शर्तों का अक्षरशः पालन करें, ताकि आस्था के साथ-साथ इस बेजुबान की सेहत और जीवन से कोई समझौता न हो।


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