मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गौवंश में तेजी से फैलते लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Virus) के खतरे को देखते हुए पशुपालन विभाग ने एक बड़ा और व्यापक मोर्चा खोल दिया है। जिले के बेजुबान गौवंश को इस घातक वायरस से सुरक्षित रखने के लिए अब मोबाइल चिकित्सा शिविर (Mobile Medical Vans) के जरिए सीधा गांव-गांव जाकर जांच और मुफ्त टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है।
मेरठ कमिश्नरी से राज्यसभा सांसद ने इस विशेष मोबाइल चिकित्सा वैन को हरी झंडी दिखाकर गांवों के लिए रवाना किया। इस दौरान पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
कैसे काम करेंगी मोबाइल वैन?
- डेली 2 गांवों का कवरेज: पशुपालन विभाग की विशेष मोबाइल टीमें रोजाना कम से कम 2 गांवों में पहुंचेंगी और वहां मौजूद गौवंश की स्वास्थ्य जांच करेंगी।
- लक्षण मिलते ही तुरंत इलाज: जिन पशुओं में लंपी वायरस के शुरुआती लक्षण दिखेंगे, उन्हें तुरंत अलग (Isolate) कर उनका इलाज शुरू किया जाएगा।
- स्वस्थ पशुओं को टीका: संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इलाके के सभी स्वस्थ गौवंश को मौके पर ही लंपी रोधी टीका (Vaccine) लगाया जाएगा।
- पशुपालकों को जागरूकता: टीमें सिर्फ इलाज ही नहीं करेंगी, बल्कि किसानों और पशुपालकों को लंपी वायरस के लक्षण, बचाव और बाड़े (Cattle Shed) की साफ-सफाई के गुर भी सिखाएंगी।

मेरठ में गौवंश और लंपी अभियान का रिपोर्ट कार्ड
| विवरण | आंकड़े / स्थिति |
| जिले में कुल गौवंश | लगभग 2,09,500 |
| प्रतिदिन टारगेट गांव | 2 गांव प्रति मोबाइल वैन |
| अभियान का मुख्य फोकस | जांच, आइसोलेशन, इलाज और टीकाकरण |
| अभियान की शुरुआत | मेरठ कमिश्नरी (राज्यसभा सांसद द्वारा हरी झंडी) |
पशुपालक ध्यान दें: लंपी के लक्षण दिखें तो तुरंत करें ये काम
- लक्षण पहचानें: पशु के शरीर पर गांठें बनना, तेज बुखार आना, आंख-नाक से पानी बहना और पैरों में सूजन।
- आइसोलेट करें: बीमार पशु को तुरंत स्वस्थ गौवंश से अलग कर दें।
- सफाई रखें: बाड़े में मक्खी और मच्छरों को पनपने न दें, क्योंकि ये वायरस फैलाने के सबसे बड़े जरिए हैं।
- विभाग को सूचना दें: तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या मोबाइल टीम को जानकारी दें।
समय पर कदम से टलेगा बड़ा संकट
मेरठ में करीब सवा दो लाख गौवंश की सुरक्षा के लिए पशुपालन विभाग का यह कदम बेहद सराहनीय है। लंपी वायरस ने पिछले कुछ वर्षों में देशभर में लाखों मवेशियों की जान ली है, जिससे पशुपालकों और डेयरी उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। गांव-गांव जाकर जांच और टीकाकरण करने से न सिर्फ संक्रमण की शुरुआती चरण में ही रोकथाम होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलेगा।


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