हर शनिवार होगी गतिविधि आधारित सीखने की प्रक्रिया
1,235 विद्यालयों के लिए ₹61.75 लाख की व्यवस्था
स्पीकर के लिए तय किए गए तकनीकी मानक
खरीद से लेकर इस्तेमाल तक निगरानी की व्यवस्था
शुरुआती शिक्षा में गतिविधियों के इस्तेमाल पर जोर
को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियों में होगा इस्तेमाल
लखनऊ, 28 सितंबर। उत्तर प्रदेश के 1,235 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में अब बच्चों की गतिविधि आधारित सीखने की प्रक्रिया के लिए ब्लूटूथ स्पीकर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए कुल ₹61.75 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रत्येक विद्यालय में एक ब्लूटूथ स्पीकर की खरीद के लिए अधिकतम ₹5,000 तक की धनराशि अनुमन्य की गई है। सरकारी निर्देशों के मुताबिक इन स्पीकर का इस्तेमाल मुख्य रूप से 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के साथ कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियों में किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में सुनने, बोलने और मौखिक अभिव्यक्ति की क्षमता को गतिविधियों के माध्यम से विकसित करना है। इस संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों में भी यही प्रावधान और धनराशि बताई गई है।
हर शनिवार होगी गतिविधि आधारित सीखने की प्रक्रिया
शासन के निर्देशों के अनुसार इन ब्लूटूथ स्पीकर का इस्तेमाल प्रत्येक शनिवार को को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्र या बालवाटिका में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के साथ किया जाएगा। इस दौरान मॉडल शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकत्री या ईसीसीई एजुकेटर बच्चों को कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियों से जोड़ेंगे।
इस व्यवस्था के जरिए बच्चों को केवल सुनने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें बोलने, प्रतिक्रिया देने और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के अवसर देने पर जोर रहेगा। शुरुआती बाल्यावस्था में भाषा और संचार कौशल के विकास के लिए कहानी, कविता, गीत और संवाद आधारित गतिविधियों को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, पीएम श्री विद्यालय परिसरों में संचालित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में उपलब्ध यह सुविधा गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद करेगी।
1,235 विद्यालयों के लिए ₹61.75 लाख की व्यवस्था
प्रदेश के 1,235 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं के लिए एक-एक ब्लूटूथ स्पीकर खरीदा जाना है। इसके लिए प्रति विद्यालय अधिकतम ₹5,000 की सीमा निर्धारित की गई है।
कुल राशि ₹61.75 लाख है। उपलब्ध विवरण के अनुसार यह धनराशि एसएनए स्पर्श के अंतर्गत जारी की गई है। इस हिसाब से निर्धारित अधिकतम राशि के आधार पर प्रत्येक चयनित विद्यालय में एक स्पीकर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इस सुविधा का उपयोग नियमित शिक्षण सामग्री के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों के साथ गतिविधि आधारित प्रारंभिक सीखने के लिए किया जाना है।
स्पीकर के लिए तय किए गए तकनीकी मानक
ब्लूटूथ स्पीकर की खरीद के लिए कुछ तकनीकी मानक भी निर्धारित किए गए हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार स्पीकर की क्षमता 30 वाट या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके अलावा Bluetooth 5.3 या उससे उच्चतर तकनीक और कम से कम 10 मीटर की कनेक्टिविटी रेंज निर्धारित की गई है।
स्पीकर में डुअल 5.2 या उससे अधिक ड्राइवर और रिचार्जेबल बैटरी का प्रावधान भी रखा गया है। बैटरी बैकअप कम से कम तीन घंटे और बैटरी क्षमता 2,000 mAh या अधिक निर्धारित की गई है।
इसके अलावा स्पीकर में Type-C चार्जिंग पोर्ट, चार घंटे या उससे कम समय में चार्ज होने की सुविधा, वायरलेस या वायर्ड माइक्रोफोन इनपुट, वॉल्यूम कंट्रोल और प्लेबैक कंट्रोल जैसे फीचर भी शामिल किए गए हैं। ये विनिर्देश प्रकाशित विवरण में दिए गए हैं।
कहानी, कविता और गीत के जरिए भाषा विकास पर जोर
प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में भाषा और अभिव्यक्ति को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी उद्देश्य से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियों से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
ऐसी गतिविधियों में बच्चों को सुनने के साथ-साथ सवालों के जवाब देने, शब्द दोहराने, गीतों में भाग लेने और अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है। सरकारी निर्देशों में भी बच्चों की सुनने, बोलने और भावनाओं को व्यक्त करने की प्रवृत्ति के विकास पर जोर दिया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को महत्व दिया गया है। उत्तर प्रदेश में पीएम श्री विद्यालयों और उनसे जुड़े प्रारंभिक शिक्षा केंद्रों के संदर्भ में गतिविधि आधारित शिक्षण को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य सरकार के एक पूर्व आधिकारिक प्रकाशन में भी पीएम श्री विद्यालयों के लिए स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आईसीटी लैब और अन्य शैक्षिक सुविधाओं का उल्लेख किया गया है।
खरीद से लेकर इस्तेमाल तक निगरानी की व्यवस्था
ब्लूटूथ स्पीकर की खरीद के साथ-साथ उसके उपयोग और गुणवत्ता की निगरानी के लिए भी व्यवस्था निर्धारित की गई है। उपलब्ध सरकारी विवरण के अनुसार विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक और नोडल शिक्षक, जबकि ब्लॉक एवं जिला स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी अनुश्रवण करेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खरीदे गए स्पीकर केवल विद्यालय में रखे न रहें, बल्कि निर्धारित गतिविधियों में उनका नियमित इस्तेमाल हो।
सामग्री की गुणवत्ता और उपलब्धता पर भी निगरानी रखी जानी है। गतिविधियों के दौरान बच्चों को किस तरह की कहानी, कविता, गीत और पहेलियों से जोड़ा जा रहा है, इसके प्रभावी संचालन की जिम्मेदारी संबंधित स्तरों पर तय की गई है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताई पहल की भूमिका
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के अनुसार बच्चों की शुरुआती सीखने की प्रक्रिया को सहज, रोचक और गतिविधि आधारित बनाने पर जोर है। उनके मुताबिक पीएम श्री विद्यालयों के को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में ब्लूटूथ स्पीकर की सुविधा से कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियों को संचालित करने में मदद मिलेगी।
वहीं, स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी के अनुसार निर्धारित गतिविधियों का नियमित संचालन बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक संवादात्मक और आनंददायक बना सकता है। उन्होंने सामग्री की गुणवत्ता, उपलब्धता और प्रभावी उपयोग की निगरानी के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर व्यवस्था का उल्लेख किया है।
ये दोनों बयान सरकार की ओर से जारी जानकारी में दिए गए हैं और इन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
शुरुआती शिक्षा में गतिविधियों के इस्तेमाल पर जोर
1,235 पीएम श्री विद्यालयों के को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं के लिए स्वीकृत यह सुविधा खास तौर पर 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए है। योजना के तहत प्रत्येक शनिवार को स्पीकर के माध्यम से कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियां संचालित की जानी हैं।
इस पहल में एक तरफ तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर है, वहीं दूसरी ओर उसके नियमित इस्तेमाल और निगरानी की व्यवस्था भी रखी गई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रत्येक विद्यालय के लिए अधिकतम ₹5,000 और सभी 1,235 विद्यालयों के लिए कुल ₹61.75 लाख की राशि निर्धारित की गई है।
यह सुविधा बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन नियमित उपयोग, गतिविधियों की गुणवत्ता और बच्चों की भागीदारी के आधार पर आगे किया जा सकेगा।



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