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State · October 13, 2026 · admin

यूपी में 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी, 15 अक्टूबर से लंबित जमीन मामलों के लिए चलेगा विशेष अभियान

उत्तर प्रदेश में आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी

12 से 18 साल से चकबंदी में फंसे गांवों को मिली राहत, उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए 15 नवंबर तक की समयसीमा

लखनऊ, 13 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में किसानों को चकबंदी संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने और भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए योगी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। प्रदेश के आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं, वर्षों से लंबित मामलों को निपटाने और निर्विवाद उत्तराधिकार व नामांतरण के प्रकरणों का समयबद्ध समाधान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा।

यूपी में चकबंदी प्रक्रिया पूरी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबित मामलों में तेजी लाने और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं को समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों को भूमि संबंधी समस्याओं से राहत दिलाना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली बाधाओं को कम करना है।

12 से 18 साल से लंबित चकबंदी मामलों में कार्रवाई

चकबंदी प्रक्रिया लंबे समय तक चलने के कारण कई गांवों में किसानों को जमीन संबंधी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। जारी जानकारी के अनुसार, महराजगंज के बैसार गांव में 18 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में भी 12 वर्षों से यह प्रक्रिया लंबित थी। इन तीनों गांवों में चकबंदी पूरी कर ली गई है।

इसके अलावा बस्ती के औराडीहा और प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया भी पूरी की गई। इन गांवों में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत प्रक्रिया समाप्त की गई है।

सरकार के अनुसार, कुल आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी हुई है। उपलब्ध विवरण में कुछ गांवों के नाम और उनमें चकबंदी की अवधि का उल्लेख किया गया है।

चकबंदी पूरी होने से संबंधित गांवों में भूमि अभिलेखों और कृषि भूमि के प्रबंधन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसानों को अपने व्यक्तिगत भू-अभिलेखों या किसी विवाद की स्थिति की जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त करनी चाहिए।

छह गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से अलग करने का फैसला

लंबे समय से चकबंदी में फंसे कुछ गांवों में प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे मामलों में चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है।

इनमें उन्नाव के अजगवां, पिडना और सादाबाद तथा बरेली के मगरासा गांव शामिल हैं। इन गांवों में करीब 12 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी। इसके अलावा बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष और बांदा के काजीपुर (गिरवान) गांव में दो वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी।

विभागीय जानकारी के अनुसार, इन गांवों में चकबंदी आगे बढ़ाने में कई तरह की व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आईं। इनमें ग्राम विकास योजना के तहत कार्य होना, नदी के कटान से प्रभावित क्षेत्र, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होना, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होना और गुटबंदी या दलगत विवाद जैसी स्थितियां शामिल हैं।

विशेष प्रयासों के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाने के कारण इन गांवों को चकबंदी से अलग करने का निर्णय लिया गया। यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित प्रक्रियाओं के समाधान की दिशा में उठाया गया कदम है।

15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान

चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान का उद्देश्य निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के लंबित मामलों का निस्तारण करना है।

उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके वैध उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शामिल होती है। वहीं, नामांतरण का संबंध भूमि अभिलेखों में संबंधित व्यक्ति के नाम का दर्ज या अद्यतन किया जाना है। ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी होने पर संबंधित लोगों को जमीन के अभिलेखों और अन्य प्रक्रियाओं में कठिनाई हो सकती है।

निर्देशों के मुताबिक, अभियान के दौरान संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को निदेशालय को प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराना होगा कि निर्धारित समयसीमा से अधिक अवधि का कोई निर्विवाद उत्तराधिकार या नामांतरण मामला जनपद में लंबित नहीं है।

अभियान समाप्त होने के बाद भी यदि ऐसे मामले तय समयसीमा से अधिक समय तक लंबित पाए जाते हैं, तो संबंधित चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से पुराने वादों पर प्राथमिकता

भूमि संबंधी विवादों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।

सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को लंबित वादों की समीक्षा कर उनके निस्तारण में तेजी लाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों को प्राथमिकता देकर न्यायिक प्रक्रिया में देरी कम करना है।

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। इससे अधिकारियों के कामकाज की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है।

अभिलेखों और कार्यालयों के निरीक्षण के भी निर्देश

चकबंदी व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए अधिकारियों को निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 के अनुसार अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों और चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करना होगा।

निरीक्षण के बाद संबंधित टिप्पणी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी। इससे अभिलेखों के रखरखाव, लंबित मामलों की स्थिति और कार्यालयों के कामकाज की समीक्षा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

किसानों को क्या फायदा मिलने की उम्मीद है?

चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने और उत्तराधिकार व नामांतरण के मामलों के समयबद्ध निस्तारण से किसानों को भूमि अभिलेखों से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलने की संभावना है। जमीन से संबंधित रिकॉर्ड अद्यतन होने पर सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने और संबंधित प्रशासनिक कार्यों को पूरा करने में भी सुविधा हो सकती है।

हालांकि, किसी विशेष किसान को मिलने वाला लाभ उसके भूमि अभिलेखों, आवेदन और मामले की स्थिति पर निर्भर करेगा। जिन लोगों के मामले लंबे समय से लंबित हैं, वे संबंधित चकबंदी कार्यालय में अपने प्रकरण की स्थिति की जानकारी ले सकते हैं।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने, पुराने वादों को प्राथमिकता से निपटाने और निर्विवाद उत्तराधिकार व नामांतरण मामलों के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। अब इन निर्देशों को तय समयसीमा के भीतर लागू करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

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