4 अक्टूबर 2026 THE PUBLIC LENS | उत्तर प्रदेश
मथुरा-वृंदावन : महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से 20 वर्षीय ओम परमेश्वर ताकपिरे 21 जुलाई को वृंदावन के लिए निकले थे, जबकि कासगंज के 16 वर्षीय मयंक सिंह चौहान 7 अगस्त को घर से निकले। दोनों के परिवार अपने स्तर पर तलाश कर रहे हैं और पुलिस-प्रशासन से मदद की अपील कर रहे हैं।
दावन में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन की इच्छा लेकर घर से निकले दो युवकों के लापता होने के मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के ओम परमेश्वर ताकपिरे और उत्तर प्रदेश के कासगंज के मयंक सिंह चौहान के परिजन उनकी तलाश में वृंदावन पहुंच रहे हैं। परिवारों को आशंका है कि दोनों युवक धार्मिक आस्था के चलते वृंदावन या आसपास के किसी क्षेत्र में रुक गए हों। हालांकि, दोनों के वर्तमान ठिकाने की पुष्टि नहीं हो सकी है।
इन मामलों में एक ओर परिजन अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं, तो दूसरी ओर पुलिस और स्थानीय प्रशासन से खोजबीन में सहयोग की मांग कर रहे हैं। परिवारों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि दोनों युवक कई सप्ताह से घर नहीं लौटे हैं।
महाराष्ट्र के ओम 21 जुलाई को घर से निकले
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर निवासी उज्ज्वला ताकपिरे का 20 वर्षीय बेटा ओम परमेश्वर ताकपिरे 21 जुलाई 2026 को वृंदावन जाने की बात कहकर घर से निकला था। परिवार के मुताबिक, ओम ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा और परिजनों का उससे संपर्क टूट गया।
बेटे की कोई जानकारी नहीं मिलने पर उसकी मां उज्ज्वला 23 जुलाई को वृंदावन पहुंचीं। उन्होंने कई दिनों तक आश्रम और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, केलीकुंज आश्रम के सीसीटीवी फुटेज में ओम दिखाई दिया था। हालांकि, फुटेज में दिखाई देने के बाद वह कहां गया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
उज्ज्वला अपने बेटे की तलाश में एक से अधिक बार वृंदावन आ चुकी हैं। रिपोर्टों में बताया गया है कि वह चौथी बार वृंदावन पहुंची थीं। रसिक दुलारी शरण की मौत की खबर सामने आने के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई। मां ने स्थानीय प्रशासन से बेटे को तलाशने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
परिवार की ओर से महाराष्ट्र में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब परिजन वृंदावन में स्थानीय स्तर पर खोजबीन और प्रशासनिक मदद के जरिए ओम का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
कासगंज का 16 वर्षीय मयंक भी दो महीने से लापता
दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले का है। आवास विकास कॉलोनी निवासी चंद्रपाल सिंह चौहान का 16 वर्षीय बेटा मयंक सिंह चौहान 7 अगस्त को घर से वृंदावन में दर्शन करने की बात कहकर निकला था। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है।
परिजनों के अनुसार, मयंक संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचन और वीडियो देखता था। वह नियमित रूप से नाम-जाप भी करता था और पहले भी वृंदावन आ चुका था। परिवार को आशंका है कि धार्मिक रुचि के कारण वह वृंदावन या आसपास के किसी आश्रम में रुक गया हो। हालांकि, यह परिवार की आशंका है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मयंक के पिता चंद्रपाल सिंह चौहान बेटे की तलाश में वृंदावन पहुंचे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, परिवार ने मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और बरसाना सहित आसपास के क्षेत्रों में भी तलाश की। केलीकुंज आश्रम पहुंचकर भी मयंक के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की गई। परिजनों का आरोप है कि उन्हें वहां से कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।
मयंक की गुमशुदगी को लेकर कासगंज थाने में शिकायत दर्ज कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। परिवार अब स्थानीय पुलिस और प्रशासन से खोजबीन में मदद की अपील कर रहा है।
दोनों परिवारों की पुलिस और प्रशासन से अपील
ओम और मयंक के मामले अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों परिवारों की चिंता एक जैसी है। वे चाहते हैं कि युवकों का पता लगाया जाए और उनकी सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित हो। परिजनों ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित आश्रम प्रबंधन से सहयोग की अपील की है।
परिवारों की मांग है कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारियों के आधार पर तलाश को आगे बढ़ाया जाए। वृंदावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में किसी लापता व्यक्ति की तलाश में आसपास के क्षेत्रों, सार्वजनिक स्थानों और संबंधित संस्थानों से जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों युवकों के लापता होने के पीछे किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका की पुष्टि नहीं की गई है। परिवारों की आशंकाओं और आरोपों को जांच से सामने आने वाले तथ्यों से अलग रखकर देखना जरूरी है।
रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद बढ़ी परिजनों की चिंता
वृंदावन के केलीकुंज आश्रम से जुड़े साधक रसिक दुलारी शरण की मौत की खबर के बाद ओम की मां की चिंता बढ़ने का उल्लेख समाचार रिपोर्टों में किया गया है। इसी दौरान आश्रम से जुड़े अन्य मामलों और लापता लोगों के परिजनों की तलाश की खबरें भी सामने आई हैं।
इन घटनाओं के बीच यह जरूरी है कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच हो और किसी एक घटना को दूसरे मामले का प्रमाण न माना जाए। ओम और मयंक के परिजनों की प्राथमिक मांग अपने बच्चों का पता लगाना और उनकी सुरक्षा की पुष्टि करना है।
फिलहाल दोनों युवकों के बारे में उपलब्ध जानकारी अधूरी है। उनके वर्तमान ठिकाने, वृंदावन पहुंचने के बाद की गतिविधियों और अब तक हुई पुलिस कार्रवाई पर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। तब तक परिवारों की तलाश और प्रशासनिक सहयोग इस मामले के सबसे अहम पहलू बने हुए हैं।



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