दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी विवाद में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन परिसर की दीवारों पर लिखे विवादित नारों के बाद चर्चा में आ गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद शुक्रवार रात प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुलाकात के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। मसूद ने विवादित नारों से दूरी बनाते हुए कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है
छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर चल रहा था प्रदर्शन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र पिछले कई दिनों से छात्र संघ चुनाव बहाल करने और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन 12 अक्टूबर से जारी था और कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। छात्रों की मांगों में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे विद्यार्थियों के मामलों की समीक्षा भी शामिल थी।
जामिया में छात्र संघ चुनाव लंबे समय से नहीं हुए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2005 में आखिरी बार चुनाव हुए थे और 2006 में छात्र संघ भंग कर दिया गया था। प्रदर्शनकारी विद्यार्थी चुनाव प्रक्रिया बहाल करने के लिए आधिकारिक कार्यक्रम घोषित करने की मांग कर रहे थे।
दीवारों पर लिखे नारों से बढ़ा विवाद
विवाद तब बढ़ा जब विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे होने की तस्वीरें सामने आईं। मीडिया रिपोर्टों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ लिखे संदेशों का भी जिक्र किया गया। इन नारों को किसने लिखा, इसकी पहचान की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई थी।
नारों को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों की ओर से आपत्तियां उठाई गईं। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस विवाद को छात्र संघ बहाली की मांग से अलग बताया। ऐसे में नारों को लेकर सामने आए आरोपों और उनकी जिम्मेदारी तय होने के बीच अंतर करना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर नारे लिखने वालों की पहचान या उनके खिलाफ अंतिम कार्रवाई की पुष्टि नहीं की जा सकती।
इमरान मसूद ने नारों से जताई असहमति
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने छात्रों से मुलाकात के बाद विवादित नारों से दूरी बनाई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और ऐसे नारों का वह समर्थन नहीं करते। उन्होंने छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग का समर्थन किया और छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।
मसूद के दौरे के दौरान विश्वविद्यालय परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ाए जाने की भी खबरें आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों से मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इस घटनाक्रम ने छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई और आगे की स्थिति
24 अक्टूबर को प्रकाशित दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही थी। रिपोर्ट में उन पर परिसर में जबरन प्रवेश करने और छात्रों को भड़काने के आरोपों का उल्लेख है। ये आरोप हैं; इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इसी रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक ड्राफ्ट कमेटी गठित की थी। प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों के मामलों की समीक्षा करने और जांच में निर्दोष पाए जाने वाले विद्यार्थियों की बहाली पर विचार करने की बात भी कही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रशासन से बातचीत के बाद छात्रों का प्रदर्शन और भूख हड़ताल समाप्त हो गई।
इस पूरे मामले में छात्र संघ चुनाव की बहाली, परिसर की दीवारों पर लिखे नारों और सांसदों के प्रवेश को लेकर उठे सवाल अलग-अलग पहलू हैं। आगे की स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रक्रिया, संबंधित शिकायतों और पुलिस की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।



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