कानपुर, उत्तर प्रदेश। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर नगर में ₹411 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद ऐसे फैसले लिए गए, जिनसे संत रविदास, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम जैसे महापुरुषों के नाम से जुड़े संस्थानों और स्थानों के नाम बदल दिए गए।
मुख्यमंत्री ने भदोही जिले, कन्नौज मेडिकल कॉलेज और लखनऊ स्थित भाषा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए सपा सरकार के तत्कालीन फैसलों की आलोचना की। इसके साथ ही उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या और मां विंध्यवासिनी धाम में हुए विकास कार्यों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार बनने के बाद इन धार्मिक स्थलों का कायाकल्प हुआ है।
सपा सरकार पर नाम बदलने का आरोप
सीएम योगी का सपा पर हमला, कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में ही भदोही का नाम संत रविदास नगर से हटाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संत रविदास के नाम से जुड़ी पहचान को बदला गया।
भदोही के नाम को लेकर ऐतिहासिक रूप से दिसंबर 2014 में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने संत रविदास नगर नाम हटाकर जिले का नाम फिर भदोही कर दिया था। इससे पहले मायावती सरकार के कार्यकाल में जिले का नाम संत रविदास नगर रखा गया था।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस फैसले को संत रविदास के नाम से जुड़ी पहचान के संदर्भ में उठाया और समाजवादी पार्टी की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
कन्नौज मेडिकल कॉलेज का भी किया जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने कन्नौज मेडिकल कॉलेज का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर था, जिसे सपा सरकार के दौरान बदल दिया गया।
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आपत्ति जताई। उन्होंने बाबा साहेब के नाम से जुड़े संस्थानों की पहचान को लेकर तत्कालीन सरकार के फैसलों की आलोचना की। कन्नौज मेडिकल कॉलेज के नाम से जुड़ा यह मुद्दा मुख्यमंत्री के पहले के सार्वजनिक बयानों में भी सामने आया है।
लखनऊ के भाषा विश्वविद्यालय का नाम बदलने का मुद्दा उठाया
मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित भाषा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले इसका नाम मान्यवर कांशीराम के नाम पर था, जिसे बदलकर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के नाम पर कर दिया गया।
उन्होंने इस उदाहरण के जरिए सपा सरकार पर महापुरुषों के नाम से जुड़े संस्थानों की पहचान बदलने का आरोप लगाया। उपलब्ध ऐतिहासिक रिपोर्टों में भी उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार द्वारा कांशीराम के नाम पर स्थापित उर्दू, अरबी और फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के नाम पर किए जाने का उल्लेख मिलता है।
मुख्यमंत्री के इन बयानों का केंद्र राज्य की पूर्ववर्ती सरकार के फैसले और महापुरुषों के नाम पर स्थापित संस्थानों की पहचान का मुद्दा रहा।
काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या का किया जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले वहां एक समय में 20 श्रद्धालु भी दर्शन नहीं कर पाते थे, जबकि अब 20 हजार श्रद्धालु दर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार बनने के बाद धाम का कायाकल्प हुआ है।
मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम में हुए बदलाव को धार्मिक स्थलों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा से जोड़कर प्रस्तुत किया। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर उनके संबोधन में दिया गया आंकड़ा स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े के रूप में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे मुख्यमंत्री के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अयोध्या और मां विंध्यवासिनी धाम का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अयोध्या और मां विंध्यवासिनी धाम में हुए विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या चमक चुकी है और मां विंध्यवासिनी धाम का भी कायाकल्प हुआ है।
योगी आदित्यनाथ ने इन धार्मिक स्थलों के विकास को प्रदेश सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया। उनके संबोधन में धार्मिक पर्यटन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और प्रमुख धार्मिक स्थलों में हुए बदलावों का उल्लेख रहा।
₹411 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के कार्यक्रम में राजनीतिक बयान
कानपुर नगर में ₹411 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों के साथ-साथ प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों पर भी टिप्पणी की।
उनके संबोधन में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए—महापुरुषों के नाम से जुड़े जिलों और संस्थानों के नाम बदलने को लेकर समाजवादी पार्टी की आलोचना तथा काशी, अयोध्या और मां विंध्यवासिनी धाम में हुए विकास कार्यों का उल्लेख।
मुख्यमंत्री के बयान में लगाए गए राजनीतिक आरोपों और विकास संबंधी दावों को उनके संबोधन के संदर्भ में समझना जरूरी है। कार्यक्रम में शामिल सभी परियोजनाओं की सूची, उनकी अलग-अलग लागत और कार्यों की समयसीमा का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है। समाजवादी पार्टी की इस संबोधन पर प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।



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