डिजिटल डेस्क। स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना के चर्चित शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ (Season 2) के हालिया एपिसोड में मजाक-मजाक में शुरू हुई नोक-झोंक अब एक बड़े विवाद में तब्दील हो चुकी है। शो के दौरान समय रैना और कॉमेडियन शेरोन वर्मा के बीच क्षेत्रीयता और कश्मीरी पंडितों के पलायन को लेकर की गई टिप्पणियां अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों तक पहुंच गई हैं।
सोशल मीडिया पर क्लिप वायरल होने के बाद जहां एक तरफ बहस छिड़ गई है, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद तीखा रिएक्शन जारी किया है।
क्या है पूरा मामला? कैसे शुरू हुई नोक-झोंक
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के मंच पर समय रैना और शेरोन वर्मा के बीच अपनी-अपनी क्षेत्रीय जड़ों को लेकर मज़ाकिया बातचीत शुरू हुई, जो देखते ही देखते पर्सनल हो गई:
- इबोला और बिहारी पृष्ठभूमि पर मज़ाक: समय रैना ने शेरोन के बिहार से होने पर तंज कसते हुए कहा-वह इतनी बिहारी हैं कि उन्हें लगता है कि ‘इबोला’ (Ebola) का मतलब है कि किसी ने कुछ कहा है (‘ई बोला’)।
- कश्मीरी पंडितों के पलायन पर करारा वार: इसके जवाब में शेरोन ने समय की कश्मीरी पृष्ठभूमि पर पलटवार करते हुए कहा– समय इतने कश्मीरी हैं कि उन्हें ‘स्टोन’ होना (नशे में धुत होना/Stoned) पसंद है।
- ‘माइक-ड्रॉप’ मोमेंट जिसने बढ़ाया विवाद: बात यहीं खत्म नहीं हुई। समय ने आगे कहा– शेरोन वर्मा एक बिहारी हैं जो नौकरी की तलाश में मुंबई आईं… बस वही ठेठ बिहारी बातें।” इस पर शेरोन ने तुरंत करारा जवाब दिया-कम से कम मैंने अपनी मर्जी से अपना राज्य छोड़ा है।
शेरोन के इस पंच को सीधे तौर पर कश्मीरी पंडितों के 1990 के दशक में हुए जबरन विस्थापन (पलायन) से जोड़कर देखा गया। सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने जहां इसे शेरोन का ‘माइक-ड्रॉप’ मोमेंट बताया, वहीं कश्मीरी पंडित समुदाय ने इसे ऐतिहासिक त्रासदी का बेहद असंवेदनशील मज़ाक करार दिया।

जम्मू-कश्मीर पीस फोरम का तीखा हमला: ‘सेंसरशिप नहीं, संवेदनशीलता चाहिए’
विवाद गहराने के बाद जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने आधिकारिक बयान जारी कर इस पर सख्त एतराज जताया है। फोरम ने कहा:
“हमारा मानना है कि कॉमेडी में आज़ादी होनी चाहिए, लेकिन आज़ादी के साथ ज़िम्मेदारी भी होनी चाहिए। बिहार कोई अपमानजनक शब्द नहीं है और कश्मीर कोई मज़ाक का विषय नहीं है। कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उनके दुख-दर्द को महज एक सुविधाजनक मज़ाक, सोशल मीडिया क्लिप या पब्लिसिटी पाने का ज़रिया नहीं बनाया जा सकता।”
फोरम ने आगे समय रैना को याद दिलाते हुए कहा:
“तीन दशकों से ज्यादा समय से कश्मीरी पंडित अपने पुश्तैनी घरों से अलगाव का दंश झेल रहे हैं। खुद समय रैना ने सार्वजनिक रूप से अपने परिवार के विस्थापन और कश्मीर छोड़ने के ट्रॉमा (Trauma) पर बात की है। कॉमेडियन को खुद पर या अपने समुदाय पर मज़ाक का अधिकार है, लेकिन जब ऐतिहासिक दुख मनोरंजन का जरिया बन जाता है, तो समाज को पूछने का हक है— कॉमेडी कहां खत्म होती है और अपमान कहां शुरू होता है? किसी अपमानजनक मज़ाक का जवाब कोई दूसरा अपमानजनक मज़ाक नहीं हो सकता।”
सोशल मीडिया पर बंटे लोग, ट्रोलिंग का शिकार हुए कॉमेडियन
वीडियो वायरल होने के बाद से ही एक्स (Twitter), यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर बहस छिड़ी हुई है। एक ओर लोग बिहारी समुदाय के खिलाफ रूढ़िवादिता और कश्मीरी पंडितों के दर्द का मज़ाक उड़ाने के लिए समय और शेरोन दोनों को ट्रोल कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, डार्क कॉमेडी के प्रशंसकों का तर्क है कि यह स्टैंड-अप कॉमेडी का हिस्सा है और इसे हल्के में लिया जाना चाहिए।
फिलहाल, इस बढ़ते विवाद और जम्मू-कश्मीर पीस फोरम के बयान के बाद समय रैना या शेरोन वर्मा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


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