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Assembly Elections 2027 · October 3, 2026 · admin

सपा कार्यालय के बाहर फिर पोस्टर वार, ‘एक कचौड़ी दो समोसा’ से BJP और चुनाव आयोग पर निशाना

लखनऊ सपा कार्यालय के बाहर एक कचौड़ी दो समोसा पोस्टर

मोहम्मद इखलाक ने लगवाया पोस्टर, ‘BJP पर भरोसा नहीं’ और ‘चुनाव आयोग में न करना भरोसा’ जैसे स्लोगन लिखे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर एक बार फिर राजनीतिक पोस्टर चर्चा में है। विक्रमादित्य मार्ग स्थित सपा कार्यालय के बाहर लगाए गए नए पोस्टर में ‘एक कचौड़ी दो समोसा’ वाली तुकबंदी के जरिए बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा गया है। पोस्टर सपा नेता मोहम्मद इखलाक की ओर से लगवाया गया है।

पोस्टर में दो प्रमुख स्लोगन लिखे गए हैं। पहले में लिखा है- ‘एक कचौड़ी दो समोसा, जनता को BJP पे नहीं भरोसा’। वहीं दूसरे स्लोगन में लिखा है- ‘एक कचौड़ी दो समोसा, चुनाव आयोग में न करना भरोसा’। पोस्टर में चुनाव आयोग की तस्वीर भी लगाई गई है। इसके जरिए पोस्टर लगाने वालों ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर अपनी राजनीतिक आपत्ति और असहमति को सामने रखने की कोशिश की है।

सपा कार्यालय के बाहर पोस्टर ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

लखनऊ स्थित सपा कार्यालय के बाहर पोस्टर लगना उत्तर प्रदेश की राजनीति में जारी पोस्टर वार का नया उदाहरण है। विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से अलग-अलग मुद्दों को लेकर पोस्टर, स्लोगन और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

सपा कार्यालय पोस्टर इस नए पोस्टर में इस्तेमाल किया गया ‘एक कचौड़ी दो समोसा’ वाला अंदाज भी इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक विरोध के नारों में चर्चा में है। इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी 1 अक्टूबर को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इसी तुकबंदी का इस्तेमाल करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा था।

अखिलेश यादव ने कहा था– ‘एक कचौड़ी दो समोसा, बीजेपी पर नहीं भरोसा।’ इस बयान के बाद यह लाइन यूपी की राजनीतिक बहस में भी चर्चा का हिस्सा बन गई।

मोहम्मद इखलाक ने क्यों लगवाया पोस्टर?

पोस्टर लगवाने वाले सपा नेता मोहम्मद इखलाक ने इसे केवल तुकबंदी या राजनीतिक नारे तक सीमित नहीं बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इखलाक ने इसे युवाओं और मतदाताओं के भरोसे से जुड़े मुद्दों से जोड़ा।

उन्होंने बीजेपी सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उनके मुताबिक, युवाओं से रोजगार और बेहतर भविष्य के वादे किए गए थे, लेकिन मौजूदा स्थिति को लेकर युवाओं में नाराजगी है। ये बातें इखलाक के राजनीतिक आरोप और बयान हैं, जिन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

सपा कार्यालय पोस्टर, चुनाव आयोग को लेकर भी पोस्टर में सवाल

पोस्टर का दूसरा स्लोगन सीधे चुनाव आयोग को लेकर है। इसमें लिखा गया है- ‘एक कचौड़ी दो समोसा, चुनाव आयोग में न करना भरोसा‘।

मोहम्मद इखलाक ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए और कुछ पुराने चुनावी विवादों का संदर्भ देते हुए अपनी आपत्ति जताई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से उठाए जा रहे सवालों का भी जिक्र किया। हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पोस्टर में लगाए गए आरोप या अविश्वास के नारे सपा नेता का राजनीतिक पक्ष हैं। इन्हें चुनाव आयोग की निष्पक्षता के बारे में स्थापित तथ्य के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

‘एक कचौड़ी दो समोसा’ नारा यूपी की राजनीति में कैसे पहुंचा?

‘एक कचौड़ी दो समोसा’ लाइन की शुरुआत राजनीतिक पोस्टर से नहीं हुई। पिछले दिनों महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हुए प्रदर्शनों में ‘एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा‘ जैसे नारे चर्चा में आए थे। बाद में इसी तुकबंदी को राजनीतिक दलों और नेताओं ने अपने-अपने मुद्दों के हिसाब से इस्तेमाल करना शुरू किया।

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने इसी लाइन को बीजेपी पर राजनीतिक तंज के तौर पर इस्तेमाल किया। इसके बाद सपा कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर में इसी तुकबंदी को दो अलग-अलग संदेशों के साथ इस्तेमाल किया गया है। यानी सोशल मीडिया और Gen-Z शैली में लोकप्रिय हुई एक तुकबंदी अब उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में भी दिखाई देने लगी है।

2027 चुनाव से पहले पोस्टर और नारेबाजी तेज

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। बीजेपी और विपक्षी दल लगातार अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे को घेर रहे हैं। सपा की तरफ से रोजगार, महंगाई, कानून-व्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। वहीं बीजेपी की ओर से सपा के आरोपों का जवाब दिया जा रहा है। ऐसे माहौल में पार्टी कार्यालयों के बाहर लगने वाले पोस्टर और उनमें इस्तेमाल किए जाने वाले छोटे, तुकबंदी वाले स्लोगन राजनीतिक संदेश को तेजी से लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं।

फिलहाल लखनऊ के सपा कार्यालय के बाहर लगा यह पोस्टर स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। पोस्टर के जरिए मोहम्मद इखलाक ने बीजेपी और चुनाव आयोग दोनों को निशाने पर लिया है, जबकि इसके राजनीतिक संदेश को लेकर आने वाले दिनों में सियासी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

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