CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा- चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह और नौकरशाही पारदर्शी हो
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से उठाई जा रही मांगों और विरोध के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का बयान सामने आया है। जोशी ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार, पारदर्शी नौकरशाही और जिम्मेदार विपक्ष को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था संविधान के दायरे में चलनी चाहिए और संविधान के उल्लंघन की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट को उस पर ध्यान देना चाहिए।
जोशी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। हाल के दिनों में विभिन्न स्थानों पर विपक्षी कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ प्रदर्शन भी किए हैं और इस्तीफे की मांग उठाई है।
मुरली मनोहर जोशी ने लोकतंत्र को लेकर क्या कहा?
मुरली मनोहर जोशी ने लोकतंत्र की अवधारणा को समझाते हुए अब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध विचार का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि लोगों की, लोगों द्वारा और लोगों के लिए बनी सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है।
जोशी ने आगे कहा कि यह व्यवस्था तब तक कायम रहेगी, जब तक चुनाव निष्पक्ष होंगे, सरकारें जवाबदेह होंगी, नौकरशाही पारदर्शी होगी और विपक्ष संवेदनशील तथा जिम्मेदार भूमिका निभाएगा। उन्होंने विपक्ष के लिए एक स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम की जरूरत की बात भी कही।
उनका बयान केवल चुनाव आयोग तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने लोकतंत्र की पूरी संस्थागत व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी।
चुनाव निष्पक्ष होने को बताया जरूरी
मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव की निष्पक्षता महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक जनता की ओर से चुनी गई सरकार तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप काम कर सकती है, जब चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कायम रहे।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध के संदर्भ में जोशी ने सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल के आरोप को सही या गलत ठहराने के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था के व्यापक सिद्धांतों पर जोर दिया। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया।
सरकार की जवाबदेही और नौकरशाही की पारदर्शिता पर जोर
जोशी ने लोकतंत्र के लिए केवल चुनाव को पर्याप्त नहीं माना। उन्होंने सरकारों की जवाबदेही और नौकरशाही में पारदर्शिता को भी महत्वपूर्ण बताया।
उनके बयान के अनुसार, लोकतंत्र में सत्ता में रहने वाली सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही होनी चाहिए। इसी तरह प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।
उन्होंने विपक्ष की भूमिका को भी इसी व्यवस्था का हिस्सा बताया और कहा कि विपक्ष को संवेदनशील तथा जिम्मेदार होना चाहिए। साथ ही उसके पास जनता के सामने एक स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम भी होना चाहिए।
संविधान के दायरे में हो लोकतांत्रिक प्रक्रिया
मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संविधान का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को उस पर ध्यान देना चाहिए।
इस तरह जोशी ने अपने बयान में चुनाव आयोग, सरकार, नौकरशाही, विपक्ष और न्यायपालिका—सभी को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग संस्थागत पक्षों के रूप में सामने रखा।
उनका कहना था कि लोकतंत्र को इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर काम करना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार को लेकर क्यों हो रहा है विवाद?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से हाल के दिनों में विरोध और इस्तीफे की मांग सामने आई है। सितंबर के अंत में हरिद्वार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर उनके खिलाफ नारेबाजी की थी और इस्तीफे की मांग उठाई थी। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग भी की थी।
वहीं, 26 सितंबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को लेकर कुछ प्रक्रियात्मक सुविधाओं की घोषणा की थी, जिनमें नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए कुछ परिस्थितियों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्यता में राहत और ऑनलाइन सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।
इस पूरे विवाद के बीच मुरली मनोहर जोशी की टिप्पणी को लोकतांत्रिक संस्थाओं और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर उनके व्यापक विचार के तौर पर देखा जा रहा है।
जोशी के बयान में विपक्ष के लिए भी संदेश
मुरली मनोहर जोशी ने अपने बयान में केवल सरकार या चुनाव आयोग की जिम्मेदारी की बात नहीं की। उन्होंने विपक्ष को भी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उसके संवेदनशील और जिम्मेदार होने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास एक स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम होना चाहिए। यानी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष की जवाबदेही के साथ-साथ विपक्ष की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।



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