Tuesday, 25 August 2026
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International · August 21, 2026 · admin

बांग्लादेश में संवैधानिक बदलाव की आहट: 23वें राष्ट्रपति बने मिर्जा फखरुल, नई सरकार ने कैबिनेट विस्तार से दिए बड़े राजनीतिक संकेत

ढाका: राजनीतिक उठापटक और बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहे बांग्लादेश को मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के रूप में नया संवैधानिक प्रमुख मिल गया है। शुक्रवार को बंगभवन के दरबार हॉल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में 78 वर्षीय आलमगीर ने बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उन्हें संसद के कार्यवाहक अध्यक्ष कायसर कमाल ने शपथ दिलाई।

समारोह में देश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान, सेना प्रमुख, अंतरिम सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और विपक्ष के नेता शफीकुर रहमान समेत कई विदेशी राजनयिक मौजूद थे।

35 वर्षों बाद प्रत्यक्ष मतदान से चुना गया राष्ट्रपति

बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह चुनाव इसलिए बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि 1991 के बाद पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले गए। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद संविधान के नियम अनुसार 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य था।

संसद में हुए मतदान में बीएनपी प्रत्याशी आलमगीर ने 255 वोट हासिल किए, जबकि विपक्षी 11-दलीय गठबंधन (जमात-ए-इस्लामी समर्थित) के उम्मीदवार सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को महज 88 वोटों से संतोष करना पड़ा।

मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार

पदभार ग्रहण करते ही राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सलाह पर 5 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसके साथ ही बांग्लादेशी कैबिनेट में सदस्यों की कुल संख्या बढ़कर 55 हो गई है।

मंत्रिमंडल में शामिल प्रमुख चेहरे:

  • अब्दुल मोईन खान: बीएनपी की स्थायी समिति के कद्दावर नेता।
  • अंदलीव रहमान: बांग्लादेश जातीय पार्टी के अध्यक्ष।
  • सा चिंग प्रू: बीएनपी सांसद।
  • रशीदुज्जमां मिल्लाट: राज्य मंत्री से पदोन्नत कर पूर्ण कैबिनेट मंत्री बनाए गए।
  • हुमायूं कबीर व शमीम कैंसर लिंकन: राज्य मंत्री पद की शपथ ली।

स्वतंत्रता और संप्रभुता से न करने का वादा

राष्ट्रपति बनने से पूर्व लंबे समय तक बीएनपी के महासचिव रहे आलमगीर ने कहा कि वे देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने 2011 से 2016 तक कार्यवाहक और फिर पूर्णकालिक महासचिव के रूप में बीएनपी को कठिन दौर से उबारा था।

संसदीय प्रणाली के तहत भले ही राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करते हैं, लेकिन बीएनपी के पास दो-तिहाई बहुमत और राष्ट्रपति भवन में अपना वरिष्ठ नेता होने से देश के आंतरिक और विदेश नीतिगत फैसलों में अब गति देखने को मिलेगी।

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